साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए सभी 75 जिलों में ‘साइबर सिंघम’ की फौज तैयार की जा रही है। जो पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक और साइबर आधारित जांच के जरिए अपराधियों पर नकेल कसेगी।
यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस में पांच चरणों में 500 फोरेंसिक एक्सपर्ट तैयार करने की योजना बनाई गई है। इस पर काम भी शुरू हो गया है। अब तक 300 विशेषज्ञ प्रशिक्षित किए जा चुके हैं, जबकि शेष बैचों का प्रशिक्षण जल्द पूरा होगा।
ये प्रशिक्षित अधिकारी अपने-अपने जिलों में जाकर अन्य पुलिसकर्मियों को भी ट्रेनिंग देंगे, जिससे पूरी पुलिस व्यवस्था में वैज्ञानिक सोच का विस्तार होगा। प्रशिक्षण के दौरान अफसरों को क्राइम सीन मैनेजमेंट, डिजिटल एविडेंस प्रिजर्वेशन, साइबर ट्रैकिंग और फोरेंसिक एनालिसिस की गहन जानकारी दी जा रही है।
इससे घटनास्थल पर साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और अपराध की सटीक पड़ताल करने में बड़ी मदद मिलेगी। संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि चौथा बैच 27 अप्रैल से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रदेश को तकनीक-सक्षम और मजबूत कानून-व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम है।
