इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने शनिवार को बिजली कनेक्शन के मामले में अहम फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि बिजली कनेक्शन पाना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति को उसके निवास स्थान पर बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता है। 

इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नया बिजली कनेक्शन देने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश रायबरेली के राना नगर निवासी महिला प्रीति शर्मा की याचिका पर दिया। याची ने नया बिजली कनेक्शन दिलाए जाने का आग्रह किया था। 

याची का कहना था कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से एक ही घर में रह रही हैं। उनके बच्चे भी छोटे हैं। आरोप है कि पारिवारिक विवाद के चलते ससुराल पक्ष के लोगों ने उनका बिजली कनेक्शन कटवा दिया जबकि वह नियमित रूप से बिजली के बिल का भुगतान कर रही थीं। 

कनेक्शन कटने के बाद उन्होंने नए कनेक्शन के लिए आवेदन किया था लेकिन बिजली विभाग ने कनेक्शन नहीं दिया। बिजली से वंचित होने के कारण बच्चों की पढ़ाई और परीक्षाओं की तैयारी पर बुरा असर पड़ रहा था। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी परिसर में निवास कर रहा है, तो वह बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का हकदार है। यह अधिकार अनुच्छेद 21(जीवन एवं स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत संरक्षित है। 

कोर्ट ने बिजली विभाग द्वारा आवेदन खारिज करने के आदेश को रद कर दिया और निर्देश दिया कि विभाग याची के आवेदन पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करके चार सप्ताह के अंदर नया कनेक्शन दे। कहा कि जरूरत होने पर विभाग याची से कोई बॉन्ड भी ले सकता है।



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