यातायात निदेशालय ने अदालत के आदेश के अनुपालन में मॉडीफाइड साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न और अवैध हूटर के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। एसओपी में ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले विदेशी वाहनों को भी भारतीय नियमों के तहत मानकीकृत करने को कहा गया है। बता दें कि कुछ विदेशी चार पहिया और दोपहिया वाहन की स्वाभाविक ध्वनि 80 डेसिबल से अधिक होती है।
एसओपी में कहा गया है कि मॉडीफाइड साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न और अवैध हूटर का बढ़ता उपयोग गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। यह अपराध होने के साथ सार्वजनिक शांति और स्वास्थ्य के लिए भी खतरा है। प्रदेश में वाहनों की बढ़ती संख्या और उनके द्वारा जनित ध्वनि प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। इसका शोर बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों के लिए मानसिक तनाव और बेचैनी का कारण भी है। एसओपी में इनको बेचने और लगाने वाले दुकानदार, गैराज, वर्कशॉप का पुलिस, ट्रैफिक, परिवहन और एसजीएसटी विभाग के अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर एफआईआर दर्ज कराने को कहा गया है। साथ ही उनकी सूची थाने और यातायात कार्यालय में रखने का निर्देश दिया गया है। वहीं फील्ड के अधिकारियों द्वारा ऐसे वाहनों की सघन चेकिंग करने और हूटर व हॉर्न को जब्त करने को कहा गया है। साथ ही वाहन का रजिस्ट्रेशन निलंबित करने का निर्देश दिया गया है।
साइलेंस जोन करें घोषित, अनावश्यक हॉर्न बजाने पर सख्ती
एसओपी में ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत नामित क्षेत्रों जैसे हॉस्पिटल, न्यायालय, स्कूल आदि के आसपास के स्थानों को साइलेंस जोन घोषित करने की कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया है। साइलेंस जोन में निर्धारित सीमा से अधिक डेसीबल के हॉर्न का प्रयोग करने पर तथा अनावश्यक हॉर्न का प्रयोग करने पर मोटरयान अधिनियम के तहत कार्रवाई करने को कहा गया है। साथ ही व्यस्त चौराहों आदि पर अनावश्यक हॉर्न बजाने वालों पर भी इसी तरह कार्रवाई होगी।
