एआई: स्मार्ट शिक्षा, इंटेलिसजेंट कैंपस परिसर सत्र में प्रोफेसर, जेपी पांडेय वाइस चांसलर एकेटीयू, डॉक्टर जयश्री पेरीवाल, फाउंडर और चेयरमैन जयश्री पेरीवाल ग्रुप ऑफ स्कूल्स और प्रोफेसर मनोज कपिल, डीन शुभारती यूनिवर्सिटी ने अपनी बात रखी।

‘हम लोग इसे एक चैलेंज की तरह ले रहे हैं’

एपी गुप्ता निर्देशक आईआई एम लखनऊ ने कहा कि हम लोग इसे एक चैलेंज की तरह ले रहे हैं। क्योंकि अगर आप 30 साल पहले जाइए, तो जब भारत में कंप्यूटर आया था तो भारत में उस समय भी ऐसी की स्थितियां थीं। तमाम इस तरह का शोर था कि कंप्यूटर आ गया है अब सारी नौकरी चली जाएंगी। लोगों का प्लेसमेंट बंद हो जाएंगे। उस समय हम स्टूडेंट थे। हम लोगों को भी चिंता था। लेकिन आप देखिए कि उल्टा ये हुआ कि हम लोगों ने कंप्यूटर को इस तरह से अडॉप्ट किया कि एक तरह से कंप्यूटर सर्विस सेक्टर की हम एक तरह से वर्ल्ड पावर की तौर पर हैं।

एआई बहुत जरूरी है, अगर आप उसे नहीं अपाएंगे तो पीछे रह जाएंगे: जयश्री पेरीवाल

जयश्री पेरीवाल ने कहा कि एआई बहुत जरूरी है, अगर आप उसे नहीं अपाएंगे तो पीछे रह जाएंगे। वरना हम डायनासोर की तरह हो जाएंगे और धीरे-धीरे विलुप्त हो जाएंगे , लेकिन इसे कैसे अपनाना है यह विवेक का विषय है।

उन्होंने कहा कि चाहे वो स्कूल हो या कॉलेज हो, डॉक्टर हो या टीचर हो, हर को जिंदगी में जब बदलाव आता है तो उसे अपनाना चाहिए, वरना हम डायनासोर की तरह हो जाएंगे और धीरे-धीरे विलुप्त हो जाएंगे, लेकिन आप उसको किस तरह से अपनाते हैं, यह एक विवेक का मामला है। मेरा मानना है कि हमें बच्चों को एआई से सशक्त बनाना चाहिए, लेकिन यह एक दोधारी तलवार है। हालांकि इसे कैसे अपनाना और उपयोग करना है, यह विवेक और समझ का विषय है। एआई इज नॉट रिप्लेसिंग टीचर, इट इज ओनली असिस्ट टीचर। 

एआई के सफर को 70 साल हो चुके हैं: मनोज कपिल

शुभारती यूनिवर्सिटी के डीन प्रोफेसर मनोज कपिल ने कहा देखिए सर्वप्रथम तो पहले मैं ये बताना चाहूंगा कि एआई नया नहीं है, एआई का जन्म जो है वो अमर उजाला से आठ साल बाद हुआ था। 1956 में एआई की टर्म को दुनिया में बताया गया कि एआई नाम की कोई चीज है। एआई के सफर को 70 साल हो चुके हैं।  ये कोई नया फील्ड तो है नहीं, पर पिछले 2022 में जनरेटिव एआई का अविष्कार हुआ। पहले जो एआई था वो खाली एनालिसिस करता था। 2022 में जो एआई आया है वो कंटेंट क्रिएट कर रहा है। 

पिछले तीन साल से एआई का इतना हल्ला है। नेचुरली यूनिवर्सिटीरज़ के सामने चिंता है। पैरेंट्स चाहते हैं कि हमारे बच्चे कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई करें। लेकिन यह समझने की बात है कि एआई सिर्फ टेक्नोलॉजी को ही एफेक्ट नहीं कर रहा है। हम इसको काउंटर करने की कोशिश कर कर रहे हैं कि इंजीनियरिंग के अलावा बाकी सभी क्षेत्रों में भी एआई शिक्षित किया जा सके। 

‘एआई एक बहुत गंभीर टेक्नोलॉजी है’

प्रोफेसर मनमोहन प्रसाद गुप्ता आईआईएम डायरेक्टर ने कहा कि एआई एक बहुत गंभीर टेक्नोलॉजी है। एआई एक सीरियस टेक्नोलॉजी है। जिस प्रकार के बदलाव होने वाले हैं, अभी दिख रहे हैं। आगे जो समय आने वाला है, उसकी कल्पना हमें किसी को नहीं है। प्रयास ये है कि हम उसके लिए तैयार कैसे हों।

जिसकी जहां जरूरत, उसको वहां प्रयोग करो: अंकुश सभरवाल

एआई और नए भारत सत्र में भारत GPT के संस्थापक एवं सीईओ अंकुश सभरवाल अपनी बात रख रहे हैं।  अंकुश सभरवाल ने कहा कि जिसकी जहां जरूरत है, उसे वहां यूज करो।



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