राजधानी की लाइफलाइन सिटी बसें अफसरों के मनमाने आदेश का शिकार हो गई हैं। शुक्रवार को 500 चालक-परिचालक व कर्मचारी आदेश से नाराज होकर हड़ताल पर चले गए, जिससे संचालन ठप हो गया। इससे करीब 20 हजार यात्री परेशान हुए। कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार कर दुबग्गा बस डिपो में धरना दिया। देर शाम तक उन्हें मनाने के प्रयास किए गए, पर बात नहीं बनी।


शुक्रवार सुबह सड़कों पर यात्री नियमित रूप से सिटी बसों का इंतजार कर रहे थे। हजरतगंज से लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज व एयरपोर्ट से लेकर अवध बस अड्डे तक यात्री सिटी बसों के लिए खड़े रहे, लेकिन दूसरी ओर दुबग्गा डिपो से बसें बाहर ही नहीं निकलीं। चालकों, परिचालकों व कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से बसें सड़कों पर नहीं उतरीं।

दुबग्गा में प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को समझाने के लिए मौके पर पुलिस भी पहुंची, लेकिन प्रदर्शनकारी नहीं माने और तीन सूत्री मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे। सूचना पर पहुंचे सिटी ट्रांसपोर्ट के एमडी अमरनाथ सहाय ने बकाया वेतन 24 घंटे में देने और भ्रष्टाचार के मामले में जांच का आश्वासन दिया, लेकिन तीसरी मांग पर कहा गया कि बोर्ड बैठक में तय हुआ है कि वर्ष 2021 में मेरिट के आधार पर भर्ती हुए संविदा बस कंडक्टर समितियों के जरिये भर्ती किए जाएंगे। इसी आदेश के खिलाफ कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। शनिवार को भी हड़ताल जारी रखने की बात कर्मचारी कह रहे हैं।

 



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