झांसी-उरई राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-27) को सिक्स लेन बनाने की परियोजना ने रफ्तार पकड़ ली है। करीब 135 किलोमीटर लंबे हाईवे के चौड़ीकरण के लिए 11 गांवों में भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। वहीं, पांच स्थानों पर बाईपास बनाए जाने की भी योजना है। अधिकारियों के अनुसार 10 जून तक डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

झांसी-कानपुर हाईवे पर प्रतिदिन हजारों वाहनों की आवाजाही होती है। लगातार बढ़ते यातायात दबाव और सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हाईवे को सिक्स लेन बनाने की परियोजना स्वीकृत की गई है। परियोजना को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहला चरण झांसी-उरई और दूसरा उरई-बारा (कानपुर) तक होगा।

एलाइमेंट का कार्य पूरा होने के बाद एनएचएआई ने झांसी-उरई खंड पर भूमि आवश्यकता का आकलन कर 11 गांवों से भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार किया है। अगले चरण में संबंधित गांवों में सर्वे कर गाटा नंबरवार अधिग्रहित होने वाली भूमि का निर्धारण किया जाएगा। एनएचएआई के परियोजना निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि झांसी-उरई सिक्स लेन परियोजना की डीपीआर लगभग तैयार हो चुकी है। 10 जून तक इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद झांसी से कानपुर और आगे लखनऊ तक की यात्रा अधिक सुगम और सुरक्षित हो जाएगी।

पांच स्थानों पर बनेंगे बाईपास

परियोजना के तहत भुजौंद, खिल्ली, सेसा, करगुंवा और खड़ेसर क्षेत्र में बाईपास प्रस्तावित हैं। इन गांवों को संपर्क मार्गों के जरिए हाईवे से जोड़ा जाएगा। परियोजना निदेशक ने बताया कि बाईपास निर्माण से स्थानीय यातायात और हाईवे ट्रैफिक को अलग करने में मदद मिलेगी।

इन गांवों से प्रस्तावित है भूमि अधिग्रहण

मिरौना, पहाड़ी बुजुर्ग, बरल, करगुंवा, बम्हरौली, भुजौंद, जराह खुर्द, खिल्ली, मड़ोरा खुर्द, सेसा और घटेश्वर गांवों में भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव तैयार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार 3-ए अधिसूचना की प्रक्रिया के तहत गांवों का चयन किया गया है। अगले चरण में पैमाइश के आधार पर अधिग्रहण योग्य भूमि के गाटा नंबर चिह्नित किए जाएंगे।



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