डिफेंस कॉरिडोर में छोटे और मध्यम उद्यमों को रक्षा क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय की ओर से झांसी नोड में अत्याधुनिक टूल सेंटर (कॉमन फैसिलिटी सेंटर) का निर्माण कराया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा, वहीं छोटे उद्यमों को भी उच्च गुणवत्ता वाले रक्षा उत्पादों के निर्माण में सहायता मिल सकेगी।
गरौठा तहसील के एरच कस्बे के पास विकसित हो रहे जनरल बिपिन रावत डिफेंस कॉरिडोर में करीब 1.82 अरब रुपये की लागत से यह टूल सेंटर बनाया जा रहा है। केंद्र के संचालन के बाद छोटे उद्यमियों को विश्वस्तरीय और महंगी मशीनों तक पहुंच मिल सकेगी, जिनके माध्यम से वे उत्पादों की डिजाइनिंग, प्रोटोटाइप तैयार करने और गुणवत्ता परीक्षण जैसे कार्य कर सकेंगे।
टूल सेंटर में सांचे (मोल्ड), डाइस, जिग्स और फिक्स्चर जैसे औद्योगिक उपकरणों के निर्माण के लिए उन्नत मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे स्थानीय एमएसएमई इकाइयां डिफेंस कॉरिडोर में स्थापित होने वाली बड़ी कंपनियों की सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकेंगी और उन्हें आवश्यक पुर्जे व उपकरण उपलब्ध करा सकेंगी।
इसके अलावा युवाओं और उद्यमियों को एयरोस्पेस तथा डिफेंस सेक्टर की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इससे क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार होगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। एमएसएमई मंत्रालय की ओर से टूल सेंटर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके पूरा होने के बाद झांसी डिफेंस कॉरिडोर में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को और गति मिलने की उम्मीद है।
इनका यह है कहना
डिफेंस कॉरिडोर में टूल सेंटर का निर्माण शुरू हो चुका है। इससे युवाओं तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त होगा। साथ ही छोटे उद्यमों को भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। – अजय कुमार अहिरवार, सहायक अभियंता-यूपीडा
