साइबर जालसाजों के मोबाइल एवं व्हाट्सएप हैक करके रिश्तेदारों और दोस्तों से पैसे मांगने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर थाने में रोजाना औसतन चार-पांच मामले इस तरह के पहुंच रहे हैं। बृहस्पतिवार को वरिष्ठ महिला चिकित्सक डाॅ. मृदृला कपूर एवं डाॅ. प्रतीक के भी मोबाइल फोन हैक हो गए। जालसाजों ने उनके मोबाइल फोन हैक करके फोन नंबर गैलरी तक पहुंच बनाकर उनके जानने वालों से मुसीबत में होने की बात कहते हुए पैसों की मांग की।

डाॅ. मृदृला के पुत्र डा. निशांत सूद ने बताया बृहस्पतिवार शाम चार बजे उनकी मां डा.मृदृला के मोबाइल फोन पर खुद को डिलीवरी बॉय बताने वाले का फोन आया। इस दौरान ओटीपी के बहाने कॉल फारवर्ड ऑप्शन एक्टिवेट कर दिया। इसके बाद ओटीपी के सहारे व्हाट्स एप हैक कर लिया। इसके बाद व्हाट्सएप में जिनके नाम थे, उन तक खुद को मुसीबत में होने की बात कहते हुए पैसों के लिए मैसेज के साथ ही बार कोड भी भेज दिया। डा. निशांत के मुताबिक कुछ देर में कई रिश्तेदारों के फोन आने पर उनको इसका पता चला। डा. प्रतीक का भी मोबाइल फोन हैक करके उनके परिचितों को भी इसी तरह के मैसेज भेजे गए।

साइबर थाना प्रभारी अरविंद कुमार का कहना है रोजाना ही इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। औसतन चार-पांच शिकायतें पुलिस के पास पहुंचती हैं। इनसे सावधान एवं सजग रहने की जरूरत है।

साइबर विशेषज्ञ डाॅ. राजीव त्रिपाठी के मुताबिक जालसाज पहले किसी तरह ओटीपी या वेरिफिकेशन कोड हासिल कर लेते हैं। इसके बाद व्हाट्सएप अकाउंट दूसरे मोबाइल में सक्रिय कर लेते हैं। अकाउंट हाथ लगते ही वे परिचितों को संदेश भेजकर रुपये मांगते हैं। कई बार प्रोफाइल फोटो और पुराने चैट होने के कारण लोग संदेश को सही मानकर पैसे भेज देते हैं। ठगी का शिकार हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बचने के लिए व्हाट्सएप पर निश्चित तौर पर टू स्टेप वेरिफिकेशन लगाकर रखें। इससे ठगी से बचा जा सकेगा। पैसों को मांगने संबंधी किसी संदेश पर बिना पुष्टि किए रकम न भेजें। किसी भी ओटीपी, वेरिफिकेशन कोड या स्क्रीन शेयरिंग की जानकारी किसी के साथ साझा न करें।

ऐसे लगाएं व्हाट्सएप में टू-स्टेप वेरिफिकेशन

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