राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की एफआईआर को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। एफआईआर में किसी भी आरोपी के पिता का नाम व पता नहीं लिखा गया है। सवाल है कि क्या ट्रस्ट के पास अपने ही कर्मियों के बारे में पूरी जानकारी नहीं रहती है। वहीं दूसरी तरफ केस में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम लगाया गया है, मतलब इसमें कोई न कोई सरकारी कर्मचारी भी आरोपी है। वह बैंक का है। फिर भी उसको नामजद न करके अज्ञात कर दिया गया। इसके पीछे की मंशा सवाल खड़ा कर रही है।

एफआईआर में कुल आठ नामजद आरोपी हैं। इसमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव व रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू नामजद हैं। 9वें नंबर पर अज्ञात आरोपी है। एफआईआर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराया है। जितने आरोपी हैं वह मंदिर से जुड़े हैं ऐसे में मंदिर प्रशासन के पास उनके बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं है। किसी भी आरोपी का पता व पिता का नाम नहीं है, सभी में अज्ञात दर्ज किया गया है। विवेचना में तो ये तथ्य सामने आ ही जाएंगे लेकिन ये स्थिति ट्रस्ट पर सवाल जरूर खड़ा करती है।

वहीं सबसे बड़ा सवाल है कि जब बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत उजागर हुई तो उनको नामजद क्यों नहीं किया गया है। क्या इसमें कोई खेल करना है, इसलिए वादी ने उनको नामजद नहीं कराया है। चोरी की घटना से लेकर एफआईआर दर्ज होने तक ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर उठ रहे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।



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