इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायतों के खत्म हो रहे कार्यकाल को बढ़ा कर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव टालने की सरकारी कवायद को झटका दिया है। कोर्ट ने 13 जुलाई तक सरकार को चुनाव की रूपरेखा पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही कहा कि असांविधानिक हो चुके नियमों के तहत ग्राम प्रधान प्रशासक की भूमिका नहीं निभा सकते हैं।
कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि किन हालातों में अस्तित्वहीन प्रावधानों के तहत ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया है। यह आदेश व टिप्पणी न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने सहारनपुर निवासी अरविंद राठौर की याचिका पर दिया है।
उधर, सुनवाई के दौरान राज्य चुनाव आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 10 जून 2026 को मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है। आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। चुनाव प्रक्रिया केवल राज्य सरकार की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण रुकी हुई है।
याची ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाने वाले 25 और 26 मई को जारी शासनादेशों को रद्द कर समयबद्ध चुनाव कराने के लिए याचिका दाखिल की है। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि कार्यकाल खत्म होने के बाद छह माह से ज्यादा चुनाव नहीं टाला जा सकता है। प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने का प्रावधान पहले ही असांविधानिक घोषित हो चुका है। कोर्ट ने याची को ओबीसी कमीशन को भी पक्षकार बनाने की अनुमति दी है।
