मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली डिजिटल जनसुनवाई प्रणाली की शुचिता व प्रशासनिक पारदर्शिता को मऊरानीपुर तहसील में तैनात कुछ जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों ने पूरी तरह तार-तार कर दिया है। उत्तरदायित्वों के निर्वहन में मनमानी व कूटरचित आख्या के सहारे एक पीड़ित किसान के विधिक अधिकारों का हनन करने का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। कुछ अधिकारियों ने खुद को बचाने व मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत का निस्तारण दिखाने के चक्कर में ऐसा कारनामा कर डाला, जिससे पूरी तहसील व्यवस्था कटघरे में खड़ी हो गई है।

बिना मौके पर जाएं लगा दी आख्या

ग्राम टिकरी निवासी खरगाई ने अपनी पैतृक कृषि भूम्यिधरी जमीन, जिसका वर्ष 2020 में बंटवारा हुआ था और प्रशासन ने 25 अप्रैल 2023 को पत्थरगढ़ी भी कराई थी। इस पर विपक्षियों ने अवैध रूप से पत्थर उखाड़ फेंकने और जमीन पर कब्जा न मिलने की शिकायत मुख्यमंत्री संदर्भ संख्या के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज कराई थी। पीड़ित ने विशेष राजस्व टीम गठित कर पुलिस बल के साथ मौके पर जाकर शांतिपूर्ण विधिक कब्जा दिलाने की याचना की थी, क्योंकि जब भी राजस्व कर्मी पैमाइश के लिए जाते हैं, तो विपक्षी पक्ष की महिलाएं हाथों में लाठी व धारदार हथियार लेकर खड़ी हो जाती हैं और जान से मारने की धमकी देती हैं। इस संवेदनशील और जानलेवा धमकियों वाले मामले में स्थलीय निरीक्षण व वैधानिक जांच सुनिश्चित करने के बजाय, संबंधित जांच द्वारा पदीय शक्तियों का दुरुपयोग किया गया। आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत का निस्तारण दिखाने की दौड़ में अधिकारियों ने पीड़ित खरगाई की शिकायत पर एक अन्य असंबंधित प्रकरण के शिकायतकर्ता ग्राम रजपुरा निवासी जगदीशचंद्र की पूर्व-निस्तारित आख्या को अपलोड कर दिया।

तहसीलदार बाेले- जांच कराएंगे

लोगों का कहना है कि इस फर्जीवाड़े के तहत पोर्टल पर रिपोर्ट लगा दी गई कि शिकायतकर्ता जगदीशचंद्र की शिकायत के संबंध में पूर्व में जांच की जा चुकी है और वह उपजिलाधिकारी के न्यायालय में धारा 134 के तहत वाद दायर करें। लोगों ने बताया कि हकीकत यह है कि टिकरी निवासी खरगाई का इस रजपुरा वाली रिपोर्ट से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। इस उदाहरण से स्पष्ट है कि मऊरानीपुर तहसील में शिकायतों का वास्तविक निस्तारण करने की जगह केवल कागजी कोरम पूरा किया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि एक जांच अधिकारी द्वारा बिना देखें, बिना पढ़े और बिना मौके पर जाएं किसी दूसरे मामले की आख्या अपलोड कर देना सीधे तौर पर मुख्यमंत्री कार्यालय को गुमराह करने और पीड़ित किसान के साथ धोखा करने जैसा है। वहीं, इस संबंध में तहसीलदार ललित कुमार पांडेय ने बताया कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है, फिर भी इसकी जांच की जाएगी।



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