क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने वाहनों के ट्रांसफर से लेकर पंजीकरण तक की सेवाओं को भी अब ऑटो मोड (स्वतः स्वीकृत स्थिति) में कर दिया है। ऐसे में आवेदकों को आरटीओ तक दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। उन्हें सिर्फ ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इस सुविधा को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पहले एक जनपद में शुरू किया जाएगा। सफलता मिलने पर प्रदेशभर में लागू किया जाएगा।
उधर, आरटीओ के अधिकारी और कर्मचारी अभी से इस निर्णय के विरोध में आ गए हैं। 20 जुलाई को शासन की मामले पर बैठक होगी। इससे पहले ही अधिकारियों और कर्मचारियों ने रविवार को बैठक बुलाई है।
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नई व्यवस्था में डीएल (सारथी पोर्टल) और वाहन पंजीकरण (वाहन पोर्टल) से जुड़ीं 52 फेसलेस सेवाओं को ऑटो-अप्रूव्ड मोड में लाया जा रहा है। 10 सेवाएं पहले से फेसलेस हैं, जबकि 12 अन्य को हाल ही में मंजूरी दी गई है। बची सेवाओं को भी जल्द ऑटो मोड में लाने की तैयारी है। शासन की मंशा के अनुरूप आरटीओ को पासपोर्ट कार्यालयों की कार्यप्रणाली के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इसके लिए उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र) मेरठ की रिपोर्ट के आधार पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू होगा।
दलालों पर कसेगी नकेल
दावा है कि नई व्यवस्था से आरटीओ में दलालों पर नकेल कसने के साथ भीड़ भी कम होगी। गड़बड़ी रोकने के लिए पुष्टि संबंधी ओटीपी सिर्फ आवेदक के पंजीकृत मोबाइल पर ही जाएगा।
– आवेदकों का सत्यापन आधार, पैन, डीएल आदि से होगा। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने एनआईसी को पत्र लिखकर तय समयसीमा में तकनीकी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए कहा है।
– इन सभी सुधारों, बीटा वर्जन की लॉन्चिंग और प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा के लिए राजस्व परिषद के सभागार में बैठक बुलाई गई है।
