आयकर विभाग ने आमजन से अपना रिटर्न आगामी 31 जुलाई तक दाखिल करने की सलाह दी है ताकि किसी नोटिस अथवा कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके। विभाग ने सभी करदाताओं को समय पर सही जानकारी के साथ अपना रिटर्न दाखिल करने और आवश्यक दस्तावेज का समर्थन भी सुनिश्चित करने की अपील की है।
बता दें कि कुछ मध्यस्थ अधिक आयकर रिफंड दिलाने के प्रलोभन में फर्जी कटौतियों या छूट का दावा करवाते हैं। करदाताओं को ऐसे प्रलोभन से सावधान रहना चाहिए। रिटर्न दाखिल करने से पहले प्रत्येक दावे की सत्यता स्वयं जांचें। बीते वर्ष आयकर विभाग के राजधानी स्थित अन्वेषण निदेशालय ने ऐसे मध्यस्थों पर तलाशी और जांच की थी जिन पर फर्जी कटौतियों और अनुचित आयकर रिफंड दिलाने के आरोप थे।
जांच में झूठे दस्तावेज पर गलत कटौतियों के दावे सामने आए थे, जिसके बाद आरोपियों के खिलाफ आयकर अधिनियम, 1961 के तहत कार्रवाई की जा रही है। आयकर विभाग आधुनिक तकनीक और डेटा विश्लेषण से रिटर्न के दावों का सत्यापन करता है। यह नियोक्ताओं, बैंकों से मिली जानकारी का रिटर्न से मिलान करता है। असामान्य रिफंड या गलत कटौती पाए जाने पर विधि अनुसार जांच की जाती है। सलाहकार द्वारा तैयार रिटर्न में भी जानकारी की अंतिम जिम्मेदारी करदाता की ही होती है। गलत दावों पर कर, ब्याज वसूली, दंड और अभियोजन की कार्रवाई हो सकती है।
