स्मार्ट प्रीपेड मीटर के नाम पर की गई अतिरिक्त वसूली के मामले को लेकर राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पावर कार्पोरेशन प्रबंधन और विद्युत वितरण निगमों के प्रबंधन को फटकार लगाई है। 20 अगस्त तक उपभोक्ताओं को रुपये लौटाने, हलफनामा देने और इसी दिन सभी बिजली कंपनियों के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।
प्रदेश के उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए सिंगल फेस पर 6,016 रुपये तथा थ्री फेस पर 11,341 रुपये की दर से वसूली की गई थी। मामला नियामक आयोग पहुंचा। आयोग ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत तय कर दी। सिंगल फेस स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत 2800 रुपये और थ्री फेस की कीमत 4100 रुपये लेने का निर्देश दिया। तय कीमत से अधिक वसूली गई रकम उपभोक्ताओं को लौटाने का निर्देश दिया। 11 अगस्त तक सभी बिजली कंपनियों के निदेशक (वाणिज्य) को खुद उपस्थिति होने का निर्देश दिया था। ऐसे में मंगलवार को पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) प्रशांत वर्मा व मध्यांचल के अधिकारी आयोग पहुंचे।
बताया कि जुलाई और अगस्त माह में कुल 93,138 विद्युत उपभोक्ताओं को धनराशि वापस की जानी थी, जिसमें 85,458 सिंगल फेस तथा 7,680 थ्री फेस उपभोक्ता शामिल हैं। इन्हें 33.22करोड़ के सापेक्ष 30.86 करोड़ के बिलों में वापस किया जाना है। करीब 2.36 करोड़ की धनराशि वापस करना बाकी है। मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार व सदस्य संजय कुमार सिंह व गिरीश कुमार वैश्य ने कार्पोरेशन प्रबंधन को फटकार लगाई।
अन्य विद्युत वितरण कंपनियों को भी जल्द से जल्द पूरा बकाया लौटाने और 20 अगस्त को हलफनामा देने का निर्देश दिया। आयोग ने कहा कि जिस धनराशि को अप्रैल के पहले बिलिंग साइकिल में ही वापस किया जाना था, उसकी वापसी जुलाई-अगस्त तक न हो पाना गंभीर बात है। चेतावनी दी कि उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
