बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि कांग्रेस व इसके सहयोगी दल और सत्ता पक्ष ने मिलकर एफसीआरए बिल का राजनीतिकरण कर दिया है जिसके कारण इस बिल को जल्दबाजी में जेपीसी भेजा गया है। उन्होंने कहा कि संसद न चलने से सरकार कई महत्वपूर्ण बिल बिना बहस के ही पास करा ले रही है। ये सत्ता पक्ष और विपक्ष की मिलीभगत लगती है। 

एक्स पर मायावती ने लिखा-

1. जैसाकि सर्वविदित है कि एफसीआरए संशोधन बिल जिसे सरकार अति-महत्वपूर्ण बताकर अन्य विधेयकों की तरह ही इसे तुरन्त पास कराना चाहती थी, किन्तु विपक्ष के जबरदस्त विरोध के चलते व संसद में इस पर बिना प्रारम्भिक चर्चा के ही इसे कल काफी आपाधापी में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेज दिया गया है।

2. वैसे इस एफसीआरए संशोधन बिल को कांग्रेस पार्टी व इनके सहयोगी दल सीधे तौर पर अल्पसंख्यक विरोधी बताकर इस बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे विदेश फंडिंग के उपयोग में कथित भ्रष्टाचार से जोड़कर इसमें कठोर बदलाव करना चाहती है। इससे स्पष्ट है कि इस बिल का सत्ता व विपक्ष दोनों ने ही राजनीतिकरण ज्यादा कर दिया है। 

3. बेहतर होता यदि विपक्ष कल इस विधेयक को रखने के दौरान संसद को चलने देता और इसकी कमियों को उजागर करता तो उसे पूरा देश जानता, लेकिन इन्होंने संसद को ही अपनी जिद के हिसाब से नहीं चलने दिया।

4. इतना ही नहीं बल्कि ऐसे अनेकों और बिल भी विपक्ष द्वारा संसद को नहीं चलने देने की वजह से सरकार ने उन्हें मिनटों में पास करा दिये हैं, जिन्हें इनको रोकना चाहिये था, जो विपक्ष ने ऐसा नहीं किया, जिसका सरकार अपने पक्ष में पूरा फायदा उठा रही है। इससे विपक्ष की या तो अन्दरूनी मिलीभगत लगती है या फिर जेन-जी के वोटों के स्वार्थ में इन्हें देश के अन्य मुद्दे बिल्कुल भी नजर नहीं आ रहे हैं। हालांकि वर्तमान हालात में जेनजी की समस्याओं के  मुद्दे को प्राथमिकता देते हुये इनको जनहित के अन्य मुद्दों को भी महत्व देना चाहिये था। 

5. इसके साथ ही, इनको अयोध्या में राममन्दिर के चढ़ावे में गड़बड़ी का अर्थात इसके भ्रष्टाचार का मुद्दा भी संसद में उठाना चाहिये था, जिसे भी अब विपक्ष ने अपने राजनैतिक स्वार्थ में पीछे कर दिया है, जबकि इस पर संसद में चर्चा होना बहुत जरूरी है। 

6. ऐसे में देश की जनता, सत्ता व विपक्ष के बीच इस समय संसद सत्र के दौरान भी चल रही उनके अपने-अपने राजनैतिक स्वार्थ की लड़ाई से पूरी तरह से सचेत रहते हुये अपनी एकमात्र अम्बेडकरवादी बहुजन समाज पार्टी, जो ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीतियों व सिद्धान्तों के आधार पर पूरी ईमानदारी व निष्ठा से चल रही है, उससे देश व आम-जनहित में जुड़ें, यही समय की मांग व सर्वसमाज के हित में भी है।

बता दें कि जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर संसद का मानसून सत्र धुल गया और सदन की कार्यवाही लगातार बाधित रही।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *