बेटियों की पढ़ाई उनके स्वास्थ्य की वजह से बाधित न हो और विद्यालय उनके लिए सुरक्षित व संवेदनशील वातावरण का स्थान बने, बेसिक शिक्षा विभाग ने इसकी पहल की है। इसके तहत सभी विद्यालयों में एमएचएम कॉर्नर स्थापित किए जा रहे हैं और छात्राओं को नि:शुल्क सेनेटरी पैड भी उपलब्ध कराया जाएगा।
इस क्रम में मासिक धर्म स्वास्थ्य व स्वच्छता से जुड़े विषयों पर शिक्षकों की समझ और संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए सभी 75 जिलों में मास्टर ट्रेनर तैयार किए जा रहे हैं। राज्य स्तर पर आयोजित दो दिन की कार्यशाला में हर जिले से तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले दिन 13 अगस्त को 37 जिलों के 111 प्रतिभागियों का प्रशिक्षण हुआ
शेष जिलों के 112 प्रतिभागियों का प्रशिक्षण 14 अगस्त को होगा। यह पहल डॉ. जया ठाकुर बनाम केंद्र सरकार व अन्य के प्रकरण में विद्यालयों में मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं और संवेदनशील शैक्षिक वातावरण को मजबूत करने की दिशा में कवायद है। इस प्रशिक्षण में यह समझ विकसित की जा रही है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य को केवल सेनेटरी पैड की उपलब्धता तक सीमित न रखते हुए सुरक्षित टॉयलेट, पानी, साबुन, उचित निस्तारण, गोपनीयता, जागरूकता और सहयोगी वातावरण से जोड़ा जाए।
प्रशिक्षण में भी मासिक धर्म स्वास्थ्य को बालिकाओं की गरिमा, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जोड़ते हुए व्यापक दृष्टिकोण पर जोर दिया गया है। साथ ही सरकारी व निजी तथा ग्रामीण-शहरी सभी विद्यालयों में आवश्यक व्यवस्थाओं और यह सुनिश्चित करने पर जोर है कि मासिक धर्म के कारण किसी छात्रा की शिक्षा प्रभावित न हो। राज्य स्तर पर प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर अपने-अपने जिलों में जाकर सभी विद्यालयों के महिला व पुरुष शिक्षक-शिक्षिकाओं को ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
हर जिले से तीन मास्टर ट्रेनर होंगे तैयार
राज्य स्तरीय प्रशिक्षण में हर जिले से नामित तीन प्रतिभागियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। पहले दिन 37 जिले के 111 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण में सहभागिता की। इनमें अंबेडकर नगर, अमेठी, औरैया, अयोध्या, बहराइच, बलिया, बलरामपुर, बांदा, गाजियाबाद, गोंडा, गोरखपुर आदि जिलों के प्रतिभागी शामिल रहे। शेष 112 प्रतिभागियों का प्रशिक्षण 14 अगस्त को होगा।
