लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर रविवार को एक घोड़ा तेज रफ्तार वाहनों के बीच दौड़ता नजर आया। इस घटना से वाहन चालकों में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह एक्सप्रेसवे हाल ही में सड़क धंसने की घटनाओं के कारण भी चर्चा में रहा है।
घोड़ा उन्नाव के आसपास एक्सप्रेसवे पर चढ़ा और कई किलोमीटर तक दौड़ता रहा। तेज रफ्तार वाहनों के बीच अचानक घोड़े के सामने आने से कई चालकों को अपनी गति नियंत्रित करनी पड़ी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की पेट्रोलिंग टीम ने घोड़े का पीछा करना शुरू किया। टीम ने डंडे से उसे भगाने का प्रयास किया, जिससे घोड़ा और तेज भागने लगा। करीब सात से आठ किलोमीटर तक पीछा करने के बाद घोड़े को लालगंज बाइपास से दो किलोमीटर पहले एक्सप्रेसवे से नीचे उतारा गया। गनीमत रही कि इस दौरान कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
एक्सप्रेसवे पर पशुओं के प्रवेश को रोकने के लिए 45 किलोमीटर ग्रीन फील्ड के दोनों ओर छह-छह फीट की लोहे की मजबूत जालियां लगाई गई हैं। इसके अलावा, जगह-जगह लोहे के गेट भी लगाए गए हैं। इतनी सुरक्षा के बावजूद एक्सप्रेसवे पर घोड़े, गाय और कुत्ते जैसे पशुओं का पहुंचना चिंताजनक है। पेट्रोलिंग टीम के चौबीसों घंटे निरीक्षण के दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं। एनएचएआई की ओर से इस संबंध में सफाई दी गई है कि कुछ स्थानों पर जालियां टूट गई थीं। इन टूटी हुई जालियों की मरम्मत का काम जल्द ही शुरू किया जाएगा।
