झांसी। ग्रामीण क्षेत्र की 1,663 महिलाएं इस वित्तीय वर्ष में अपनी छोटी औद्योगिक इकाइयां लगाकर न केवल आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने का माध्यम बन सकेंगी। इसके लिए उन्हें बैंकों से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता दिलवाई जा रही है।
एनआरएलएम के तहत ग्रामीण महिलाओं को बैंक ऋण के जरिये स्वरोजगार स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ ही उनके परिवार की आय बढ़ाना है। इसी क्रम में इस वित्तीय वर्ष में जिले की 2,500 महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है। अब तक 837 महिलाओं को बैंकों से कर्ज मिल चुका है। शेष 1,663 महिलाओं के ऋण की प्रक्रिया चल रही है।
लघु और कुटीर उद्योगों में बढ़ाएंगी कदम
कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) के तहत महिलाएं कई तरह की गतिविधियां शुरू कर सकती हैं। इनमें डेयरी, कृषि आधारित काम, आटा चक्की, तेल एक्सपेलर, अगरबत्ती निर्माण, बड़ी-पापड़ और चॉक बनाने समेत अन्य लघु एवं कुटीर उद्योग शामिल हैं। पात्र महिला को एनआरएलएम की संस्तुति के आधार पर शुरुआत में डेढ़ लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। दो साल तक ऋण का सही ढंग से संचालन करने पर छह लाख रुपये तक का अतिरिक्त ऋण मिल सकता है। जिले के प्रत्येक ब्लॉक में 320 महिलाओं को बैंक ऋण उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
सबसे ज्यादा 147 महिलाओं को बंगरा में मिला कर्ज
सीसीएल के तहत अब तक बंगरा ब्लॉक की 147 महिलाओं को, बबीना की 137, मऊरानीपुर की 122, बड़ागांव और चिरगांव की 98-98, गुरसराय की 89, मोंठ की 82 और बामौर की 64 महिलाओं को बैंक से ऋण मिल चुका है।
जिले की 2,500 ग्रामीण महिलाओं को ऋण दिलाकर स्वरोजगार से जोड़ने का लक्ष्य है। इनमें से अब तक 837 महिलाओं को ऋण दिलाया जा चुका है। शेष महिलाओं की ऋण प्रक्रिया चल रही है।
– सुनील कुमार सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनआरएलएम
