झांसी। गेमिंग पेमेंट एप के सहारे ठगी करने वाले गिरोह के भंडाफोड़ के बाद पुलिस की छानबीन में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस की नजर से बचने के लिए शातिर जालसाज ठगी की रकम को डिजिटल तरीके से ठिकाने लगाते थे। इसके लिए बाइनेंस जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता था। जांच में अब तक 50 हजार से अधिक डॉलर और यूआन की जानकारी मिली है। पुलिस इस रकम की आगे की कड़ी भी तलाश रही है।
जांच में पता चला कि गेमिंग पेमेंट एप के जरिये रकम हासिल करने के बाद जालसाज उसे सीधे बैंक खातों से निकालने के बजाय बाइनेंस जैसे प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल करते थे। इससे रकम का लेनदेन बैंकिंग चैनल से बाहर हो जाता था और पुलिस की निगाह से बचा रहता था।
जालसाजों ने चाइनीज गेमिंग एप को निशाना बनाकर उसका पेमेंट सर्वर हैक कर लिया था। इसके बाद गेमिंग एप को मिलने वाला शुल्क अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। पुलिस के मुताबिक, महज आठ महीने में करीब 42.35 करोड़ रुपये का गोलमाल किया गया। जांच में सामने आया कि रकम इंडोनेशिया और केरल स्थित सहकारी बैंकों में जमा हुई। इसके बाद एप की मदद से रकम को डॉलर और यूआन में बदला गया।
बाइनेंस पर सबसे अधिक रकम जमा होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, यह रकम बाद में कहां इस्तेमाल हुई और किन खातों तक पहुंची, इसकी जानकारी अभी पुलिस को नहीं मिल सकी है। एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति ने बताया कि जालसाजों के दूसरे वित्तीय नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। बरामद रकम को सीज कराया गया है।
तीन महीने बाद भी नहीं पकड़ा जा सका मास्टरमाइंड
कानपुर रेल मंडल में तैनात कर्मचारी को भी तलाश रही पुलिस
गेमिंग सर्वर हैक कर ठगी करने के आरोप में पुलिस ने मई में प्रेमनगर के स्कूलपुरा मोहल्ले के पास से रागिब अहमद समेत सात साइबर जालसाजों को पकड़ा था। मामले में पुलिस को कानपुर रेल मंडल में तैनात सलाम और हर्ष की भी तलाश है लेकिन तीन महीने बाद भी दोनों पुलिस के हाथ नहीं आए हैं। हर्ष को गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
पुलिस तीन महीने से हर्ष और सलाम की तलाश कर रही है। दोनों लगातार पुलिस को चकमा दे रहे हैं। इस मामले में पुलिस मिशन कंपाउंड निवासी सनी अमराया, पानी की टंकी निवासी सोहिल खान, नगरा निवासी अनुभव सिंह, ईसाई टोला निवासी दानिश खान, महावीरन मंदिर निवासी सौरभ विश्वकर्मा और सुमेर नगर निवासी देवेश कुमार को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
सुलगते सवाल
42.35 करोड़ रुपये की ठगी के बाद रकम का बड़ा हिस्सा आखिर कहां पहुंचा?
डॉलर और यूआन में बदली गई रकम का इस्तेमाल किसने किया?
बाइनेंस जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म तक ठगी की रकम कैसे पहुंची?
विदेशी मुद्रा में रकम बदलने के पीछे गिरोह का मकसद क्या था?
तीन महीने बाद भी मास्टरमाइंड हर्ष और सलाम पुलिस की पकड़ से दूर क्यों?
इतनी बड़ी रकम के लेनदेन पर बैंकिंग सिस्टम की निगरानी क्यों नहीं हो सकी?
क्या इस नेटवर्क में अभी और लोग शामिल हैं?
