उरई। करीब चार साल पुराने छात्रा से दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और धमकी के मामले में आरोपी प्रोफेसर को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट राजीव सिंह ने दोनों पक्षों की बहस, गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद फैसला सुनाया।
कालपी कोतवाली क्षेत्र की युवती ने वर्ष 2022 में पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि डॉ. संतोष कुमार पांडेय ने उसके पिता से पढ़ाई में मदद करने और बिना फीस पढ़ाने की बात कही थी। इसके बाद वर्ष 2018 में वह आरोपी के घर पढ़ने गई थी। आरोप था कि इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए और वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल करने का भी आरोप लगाया गया था।
तहरीर में युवती ने वर्ष 2018 से 2022 के बीच कई बार जबरन संबंध बनाने और धमकाने के आरोप लगाए थे। आरोप था कि हरिद्वार स्थित विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान भी आरोपी वहां पहुंचा और होटल में उसके साथ जबरन संबंध बनाए। इसके अलावा 12 फरवरी 2021 को विरोध करने पर चाकू से हाथ पर वार करने और घर में बंधक बनाने का आरोप लगाया गया था। 24 नवंबर 2021 को वीडियो वायरल करने की धमकी देकर बुलाने और मारपीट करने की बात भी तहरीर में कही गई थी।
युवती ने एक अन्य घटना में रस्सी से गला कसने और 10 अगस्त 2022 को घर बुलाकर जबरन संबंध बनाने, गला दबाने व मारपीट करने के आरोप लगाए थे। मामले में पुलिस ने कालपी कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की थी।
पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से वादी समेत अन्य गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने तर्क रखे। गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने डॉ. संतोष कुमार पांडेय को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
