प्रदेश में चीनी के दाम काबू में आने शुरू हो गए हैं। सीएम योगी की सख्त अपील और निर्यात नियमों में ढील के बाद यह बदलाव देखा जा रहा है। जानकारों के अनुसार जल्द ही कीमतें सामान्य हो जाएंगी।
चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे कम उत्पादन के साथ कालाबाजारी भी बड़ी वजह बनकर सामने आई है। महाराष्ट्र और कोलकाता से बढ़ी मांग के कारण बाजार में कालाबाजारी बढ़ी। यूपी सरकार ने सख्ती करते हुए चीनी मिलों और स्टॉकिस्टों के यहां जांच शुरू की तो दो दिन में प्रदेश भर में थोक कीमतों में 200-300 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ गई। यानी रेट में 2-3 रुपये प्रति किलो की कमी हुई है।
चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के मुताबिक प्रदेश की चीनी मिलों में करीब 180 लाख क्विंटल स्टॉक है। प्रदेश में हर महीने लगभग 40 लाख क्विंटल चीनी की खपत होती है। विभाग का दावा है कि नए पेराई सत्र यानी नवंबर तक चीनी की कमी नहीं होगी।
विभागीय सूत्रों के अनुसार करीब एक महीने पहले महाराष्ट्र में चीनी की कमी होने पर वहां और कोलकाता के बड़े स्टॉकिस्ट व डीलरों ने उत्तर प्रदेश से चीनी खरीदना शुरू किया। बड़े खरीदारों ने 4000-5000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलों में खरीद के टेंडर डाले। अचानक बढ़ी मांग और नए ऑर्डर से मिलों ने भी कीमतें बढ़ा दीं। 22 अगस्त को जिन मिलों में चीनी 5100 रुपये प्रति क्विंटल थी, वहां 23 अगस्त तक भाव लगभग 4800 रुपये हो गए।
मिल से चीनी उठने से ग्राहक तक पहुंचने में केवल 5-6 रुपये प्रति किलो का अंतर आता है लेकिन एक महीने में मिलों ने 600-700 रुपये प्रति क्विंटल तक अतिरिक्त कमाई की। बिचौलियों ने 1000-1500 रुपये प्रति क्विंटल तक मुनाफा कमाया। इसी वजह से अब अभियान चलाया जा रहा है।
