झांसी। नौकरी दिलाने की आड़ में धर्म बदलने का खेल करने वाले चर्च के बारे में खुलासा करने वाले हमीरपुर के छेदी बेनी गांव निवासी पवन कुमार का 3:58 मिनट लंबा वीडियो भी सामने आया है। इसमें वह ईसाई बना देने की पूरी कहानी बता रहा है। उसने अपनी जान का खतरा भी बताया है। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद पुलिस सोमवार को सक्रिय हुई। पुलिस ने प्रार्थना पत्र के आधार पर चर्च के बारे में जानकारी भी जुटाई। पुलिस अब युवक के झांसी आने का इंतजार कर रही है।
इस वीडियो में पवन साफ तौर पर कहते सुनाई पड़ रहा है कि नौकरी न होने की वजह से वह परेशान था। बीमार होने पर वह उपचार के लिए मेडिकल अस्पताल आया। यहां उसकी एक पादरी से मुलाकात हुई। नौकरी दिला देने के बहाने उसे अपने साथ ले गया। वहां प्रार्थना सभा चल रही थी। उसे प्रार्थना सभा में शामिल किया गया। उसके सिर के ऊपर हाथ फेरने के बाद उससे भी प्रार्थना कराई गई। इसके बाद उसे कुछ किताबें देकर प्रचार करने के लिए कहा गया। पवन का कहना है कि उसे ईसाई बना दिया गया, लेकिन नाम नहीं बदला।
उसे बाद में मालूम चला कि वह अब ईसाई बन गया। परिवार के लोगों को यह पता चलने पर उसे घर से निकाल दिया। पवन का कहना है कि जब उसने वापस अपने पुराने धर्म में जाने की बात कही जब आरोपी उसे धमकाते हुए मारने पीटने लगे। बता दें, भुक्तभोगी पवन ने पिछले माह तत्कालीन एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति से शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने एसपी सिटी प्रीति सिंह को इस मामले की जांच सौंपी लेकिन, एक महीने बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आई।
इस मामले की जांच कराई जा रही है। सभी अहम साक्ष्य भी पुलिस तलाश रही है। मामला सही मिलने पर प्राथमिकी दर्ज करके पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।
विकास कुमार, एसएसपी
पहले भी धर्मांतरण के खेल का हो चुका भंडाफोड़
झांसी में वर्ष 2023 में प्रेमनगर के महावीरन नगर मोहल्ले में बड़े पैमाने पर चल रहे धर्मांतरण के खेल का भंडाफोड़ हो चुका। इस मामले में पुलिस ने प्रेमनगर निवासी अभिषेक कुमार, पूनम चौधरी, संतोष कुमार, पास्टर आस्टिन स्मिथ एवं पास्टर रोशनी को आरोपी बनाया था। धर्मांतरण से जुड़ा मामला होने के नाते गृह विभाग इसकी सीधी निगरानी कर रहा है। जांच पड़ताल के दौरान विदेशों से फडिंग की बात भी सामने आई थी। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक लाल डायरी बरामद की थी। इसमें एक एनजीओ के माध्यम से लाखों रुपये विदेशों से मिलने का प्रमाण भी मिला था। इनका इस्तेमाल धर्मांतरण में किया जा रहा था।
