झांसी। मेडिकल कॉलेज में नेत्र बैंक शुरू करने की फाइल पिछले 13 साल से दौड़ रही है, लेकिन लाइसेंस के पायदान पर आकर अटक गई है। दिसंबर 2025 में निरीक्षण करने आई टीम ने व्यवस्थाओं को उचित पाते हुए लाइसेंस की संस्तुति भी कर दी, इसके बाद शासन ने जरूरी रिपोर्ट मांगी और वह भी भेज दी गई। बावजूद इसके अब तक लाइसेंस जारी नहीं हुआ है। ऐसे में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा शुरू होने के साथ एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है कि नेत्रदान के बाद कॉर्निया प्रत्यारोपण की सुविधा आखिर कब शुरू होगी?
मेडिकल कॉलेज प्रशासन वर्ष 2012 से नेत्र बैंक स्थापित करने के प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में नौ दिसंबर 2025 को शासन ने दो डॉक्टरों की टीम को नेत्र बैंक की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने भेजा था। टीम ने व्यवस्थाओं को उचित पाते हुए शासन को लाइसेंस देने की संस्तुति की थी। इसके बाद शासन ने 25 जून और 12 अगस्त को पत्र भेजकर एनएबीएच एक्रीडेशन और मेडिकल कॉलेज के पंजीकरण से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से दोनों रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी लाइसेंस जारी नहीं हुआ है।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि लाइसेंस का इंतजार करते हुए कई साल बीत चुके हैं। जब तक नेत्र बैंक शुरू नहीं होगा, तब तक मेडिकल कॉलेज में कॉर्निया प्रत्यारोपण संभव नहीं है।
जागरूकता पर जोर, लेकिन सुविधा का इंतजार
स्वास्थ्य विभाग का 41वां नेत्रदान पखवाड़ा शुरू हो गया है। सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी ने जागरूकता शिविर आयोजित करने, प्रचार-प्रसार करने और स्कूलों में रैलियां निकालने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, नेत्र बैंक की सुविधा शुरू नहीं होने से नेत्रदान के बाद कॉर्निया का उपयोग स्थानीय स्तर पर प्रत्यारोपण के लिए नहीं हो पा रहा है।
इसलिए मनाया जाता है नेत्रदान पखवाड़ा
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा हर वर्ष 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जाता है। यह 14 दिनों का जागरूकता अभियान होता है। इसका उद्देश्य नेत्रदान के प्रति लोगों को जागरूक करना और मृत्यु के बाद कॉर्निया दान के लिए प्रेरित करना है।
किसे नहीं करना चाहिए नेत्रदान
नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर, एड्स, हेपेटाइटिस, शॉक, मल्टी ऑर्गन फेल्योर, रेबीज या सेप्टीसीमिया से पीड़ित व्यक्तियों के कॉर्निया का उपयोग प्रत्यारोपण के लिए नहीं किया जाता है।
