उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में प्रबंध समिति का चुनाव लटकाकर प्राधिकारी नियंत्रक बने रहने की व्यवस्था पर शासन ने सख्ती शुरू कर दी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने प्रबंध समिति के विवाद से जुड़े 36 विद्यालयों के मामलों में माध्यमिक शिक्षा निदेशक से जवाब-तलब किया है। साथ ही, इन विद्यालयों में प्रबंध समिति के चुनाव व गठन की अपडेट जानकारी भी मांगी गई है।

विभाग के विशेष सचिव संदीप परमार की अध्यक्षता में जुलाई में हुई बैठक में संबंधित विद्यालयों में जल्द प्रबंध समिति गठित करने के निर्देश दिए गए थे। अब शासन ने बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुपालन की स्थिति मांगी है। प्रबंध समिति में विवाद होने पर मामला रजिस्ट्रार, सोसाइटी, चिट्स एंड फंड के समक्ष जाता है। वहां निर्णय लंबित रहने पर संयुक्त शिक्षा निदेशक या जिला विद्यालय निरीक्षक किसी समूह ख के अधिकारी को प्राधिकारी नियंत्रक नामित कर सकते हैं। कई मामलों में सह जिला विद्यालय निरीक्षक या राजकीय कॉलेज के प्राचार्य को भी यह जिम्मेदारी दी जाती है।

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प्राधिकारी नियंत्रक विद्यालय के प्रबंधक के रूप में शिक्षकों की प्रोन्नति, भवन निर्माण, अवकाश व वेतन समेत खास मामलों में निर्णय लेते हैं। शासन को आशंका है कि कुछ मामलों में प्रबंध समिति का चुनाव अनावश्यक रूप से लंबित रखा जा रहा है। ऐसे में विवादों का निस्तारण कर नई समितियों के गठन के निर्देश दिए गए हैं।

कई स्कूल हैं शामिल: इन 36 विद्यालयों में लखनऊ के क्वींस एंग्लो संस्कृत इंटर कॉलेज और श्री योगेश्वर ऋषिकुल इंटर कॉलेज, रायबरेली का गांधी विद्यालय इंटर कॉलेज तथा अयोध्या का लाला राम कुमार इंटर कॉलेज समेत उन्नाव के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, स्वामी विवेकानंद इंटर कॉलेज और आदर्श इंटर कॉलेज शामिल हैं।



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