उत्तर प्रदेश में अधिकतम बिजली चोरी वाले फीडरों से जुड़े अभियंताओं के खिलाफ बिजली निगमों ने विजिलेंस जांच की सिफारिश की है। इसकी भनक लगते ही अभियंताओं ने आंदोलन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि पॉवर कॉर्पोरेशन ने संलिप्तता होने पर जांच के निर्देश दिए हैं, जबकि बिना संलिप्तता पाए ही विजिलेंस जांच के आदेश आदेश जारी किए जा रहे हैं। यह गलत है।
अमर उजाला ने रविवार के अंक में खबर प्रकाशित कर बताया था कि जिन फीडरों पर सर्वाधिक बिजली चोरी हो रही है, वहां के अभियंताओं के खिलाफ जांच कराई जाएगी। इसके बाद बिजली निगमों ने कार्रवाई की संस्तुति है। पूर्वांचल निगम प्रयागराज के मुख्य अभियंता पीए मोगा ने प्रबंध निदेशक को इस संबंध में पत्र भेजा है। इसमें बताया है कि प्रयागराज जोन के भीरपुर उपकेंद्र के मुंगारी फीडर पर वर्ष 2025-26 में 84.01 प्रतिशत लाइन हानि है।
6.69 करोड़ राजस्व हानि
इस फीडर पर कुल राजस्व हानि 6.69 करोड़ का है। ऐसे में उपकेंद्र पर कार्यरत टीजी 2 विजय बहादुर पाल, तत्कलीन जेई आकाश पांडेय, उपखंड अधिकारी आलोक रंजन गुप्ता की संलिप्तता प्रतीत होती हैं। अधिशासी अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता ने भी इनके खिलाफ राजस्व हानि के दृष्टिगत विजिलेंस जांच की संस्तुति की है।
ऐसे में इन सभी के खिलाफ विजिलेंस जांच कराई जाए। ऐसे ही अन्य कई फीडरों के अभियंताओं के खिलाफ भी विभिन्न निगमों के प्रबंध निदेशकों को बिजली चोरी के जिम्मेदार अभियंताओं के खिलाफ विजिलेंस जांच के ई मेल भेजे गए हैं। इनमें ज्यादा ऐसे अभियंता हैं जो लंबे समय से एक ही फीडर पर तैनात हैं।
आंदोलन की चेतावनी
विजिलेंस जांच की सिफारिश की जानकारी पर उप्र जूनियर अभियंता संघ के अध्यक्ष नीरज बिंद ने आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि किस मानक के आधार पर संलिप्तता बताई जा रही है। कहा, पूरे मामले में मुख्य अभियंता सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी जांच होनी चाहिए।
