प्रदेश के कई जिलों में हो रही बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं। जनजीवन अस्त व्यस्त है। घर और दुकान बाड़ से घिरने के कारण लोग परेशान हैं। रोजगार बंद होने से रोजी रोटी का संकट है। घर और दीवार गिरने से सात लोगों की मौत हो गई।
चित्रकूट में बृहस्पतिवार को मंदाकिनी की जलधारा घाटों के ऊपर पहुंची तो कभी रामघाट से कामतानाथ जाने वाले मार्ग पर पहुंची। इससे नदी किनारे बसे 250 से अधिक परिवार दहशत में आ गए। उधर, सदर कोतवाली के बराछ गांव में कच्ची दीवार और छत ढहने से कल्लू यादव (35) और उसके दो मासूम बच्चों की दबकर मौत हो गई। पत्नी और बेटी अस्पताल में भर्ती है। वहीं, सीतापुर में दो महिलाएं, बहराइच में एक बालिका और बाराबंकी भी एक व्यक्ति की जान चली गई।
एनडीआरएफ की टीम ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाला
कानपुर में पांडु नदी का जलस्तर बढ़ने से 10 इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हो गए। गोपालपुरम और जरौली फेज-2 में करीब 25 परिवार जलभराव में फंस गए। सूचना पर एनडीआरएफ की टीम ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। इनके साथ ही मायापुरम, रविदासपुरम, मदनपुर, मेहरबान सिंह का पुरवा, वरुण विहार कच्ची बस्ती, सुंदरनगर, महावीरनगर और विद्यार्थी कॉलोनी में करीब 34 हजार लोग बाढ़ की चपेट में हैं।
अंबेडकरनगर, बाराबंकी, अयोध्या और बहराइच में सरयू की बाढ़ का दायरा बढ़ता जा रहा है। देवरिया के भागलपुर में सरयू नदी का जलस्तर पांच दिन से लगातार बढ़ रहा है। नदी का बढ़ता पानी रिहायशी इलाकों की ओर पहुंचने लगा है। क्षेत्र के कई तटवर्ती गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बस्ती में सरयू नदी के जलस्तर ने बाढ़ का स्त्रतरा बढ़ा दिया है। यहां जलस्तर खतरे के निशान से 11 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है।
