यूपी की दलित राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक नया राजनीतिक मोर्चा बनता दिख रहा है। स्विट्जरलैंड से लौटने के बाद रोहिणी घावरी प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होने की तैयारी में हैं। उनका मुख्य फोकस वाल्मीकि समाज को एकजुट करने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उन 21 विधानसभा सीटों पर है, जहां वाल्मीकि मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जाती है। इन इलाकों में आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर का भी प्रभाव माना जाता है।
रोहिणी वाल्मीकि समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए इन क्षेत्रों में अभियान चलाने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि वाल्मीकि समाज को लंबे समय से मुख्य रूप से सफाईकर्मी के तौर पर देखा गया, जबकि राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उसकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम रही है। वह अगले पांच साल में किसी राज्य में वाल्मीकि समाज से मुख्यमंत्री बनाए जाने का लक्ष्य भी सामने रख रही हैं।
उनकी नजर आगरा कैंट, एत्मादपुर, जसराना, फिरोजाबाद, मेरठ कैंट, मेरठ शहर, गाजियाबाद, लोनी, लखनऊ की मध्य, उत्तर और पश्चिम विधानसभा सीटों के अलावा सीसामऊ, आर्यनगर, किदवईनगर, अलीगढ़ और खैर समेत 21 सीटों पर है। इन सीटों पर वह जाटव और वाल्मीकि समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल उठाने की तैयारी में हैं।
