झांसी। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए साइबर थाना बना दिया गया लेकिन, छह साल बाद भी थाने में न हवालात की व्यवस्था हुई न मालखाना बना। ऐसे में साइबर अपराध के आरोप में पकड़े जाने वालों को रखने के लिए साइबर पुलिस को दूसरे थानों की मदद लेनी पड़ती है। कई बार थाने भी उनके आरोपी को रखने के लिए राजी नहीं होते। इस वजह से एक थाने से दूसरे थाने के बीच आरोपी के साथ उनको चक्कर भी काटना पड़ता है। थाने में मालखाना भी नहीं है। इस वजह से माल मुकदमाती रखना मुश्किल है।

साइबर थाने की टीम पिछले छह माह में कटेरा, प्रेमनगर, कोतवाली समेत कई इलाकों में कार्रवाई करते हुए 50 से अधिक आरोपियों को पकड़ चुकी। इनके पास से साइबर पुलिस 60 से अधिक मोबाइल फोन, नकदी, बैंक दस्तावेज समेत कई वस्तुएं बरामद कीं। कटेरा में पकड़े गए जालसाजों से 1.274 किलो चांदी, 284 ग्राम सोना भी बरामद हुआ। जालसाजों से मोटर साइकिल एवं कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट भी बरामद हुए लेकिन, इनको रखने के लिए थाने का अपना कोई मालखाना नहीं है। मालखाने में पुलिस की हथकड़ी समेत विवेचना से संबंधित अन्य सामान भी रखा जाता है, लेकिन साइबर थाने में इसके लिए स्थाई व्यवस्था नहीं है। अस्थाई तौर पर मालखाने की व्यवस्था बनाई गई। वहीं, थाने में हवालात की कोई व्यवस्था नहीं है। जो जालसाज पकड़े जाते हैं, उनको अलग-अलग थानों में रखा जाता है। कटेरा में पकड़े गए जालसाजों भी अलग-अलग थानों में रखे गए थे। एसएसपी विकास कुमार का कहना है कि साइबर थाने को नया स्वरूप दिया जा रहा है। उसमें इसकी सभी व्यवस्थाएं की जाएंगी।

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आरोपी के साथ भटकते हैं पीआरवी कर्मी

सिर्फ साइबर थाना ही नहीं, डायल-112 पुलिसकर्मियों को भी हवालात की व्यवस्था न होने से कई बार आरोपी को लेकर भटकना पड़ता है। आमतौर पर आधी रात के बाद किसी घटना की सूचना पर अक्सर सबसे पहले डायल-112 की टीम मौके पर पहुंचती है। आरोपी के शराब के नशे में होने या अन्य कारणों से उसे तत्काल थाने में रखने की जरूरत पड़ने पर डायल-112 की टीम को उसे लेकर थाने पहुंचती है लेकिन, संबंधित थाना पुलिस उसे अपने यहां रखने से इन्कार कर देती है। ऐसी स्थिति में पीआरवी कर्मियों को एक से दूसरे थाने के बीच भटकना पड़ता है।



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