ललितपुर। चांदपुर-जहाजपुर में चंदेलकालीन प्राचीन धरोहरों का विशाल संग्रह है। यहां की मूर्तियों में चंदेलकालीन कलाकृतियां स्पष्ट दिखती हैं। हालांकि, जर्जर पहुंच मार्ग के कारण पर्यटकों को काफी परेशानी होती है।
चांदपुर में सहस्त्रालिंगेश्वर मंदिर का विशेष स्थान है। जहाजपुर में तला का बाड़ा के पास दो प्राचीन खंडित मंदिर हैं। ये मंदिर लाल पत्थरों से बने हैं। इनके प्रत्येक द्वार पर देवी-देवताओं की आकर्षक कलाकृतियां हैं। अधिकांश स्थानों पर नंदी और वराह भगवान की मूर्तियां भी मौजूद हैं। इन मंदिरों के चारों ओर बिना शिवलिंग के दर्जनों आधार शिलायुक्त अवशेष भी बिखरे हैं। विशाल मानव पैर नुमा सैकड़ों अधूरी प्रतिमाएं भी यहां मिलती हैं।
यह स्थान जनपद के धौर्रा रेलवे स्टेशन से करीब चार किलोमीटर दूर है। रेलवे गेट के पूर्व में चांदपुर और पश्चिम में जहाजपुर स्थित है। मंदिर की बाहरी दीवार पर 10वीं से 13वीं सदी की सहस्त्र लिंगेश्वर और विष्णु भगवान की मूर्तियां उकेरी गई हैं। तालाब के पीछे दो मंदिर हैं, जिनकी दीवारों पर गणेश, वराह, हाथी, घोड़ा और शेर की भव्य कलाकृतियां हैं। सड़क मार्ग, पानी और बिजली की व्यवस्था न होने से पर्यटकों को असुविधा होती है।
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कैप्शन-बलराम कुशवाहा।
रेलवे क्रॉसिंग से चांदपुर-जहाजपुर मंदिर तक जाने का मार्ग काफी जर्जर है। बीते सप्ताह चांदपुर जहाजपुर जाने के लिए गए, तो रास्ता कच्चा होने के साथ ही बारिश होने से और भी खराब हो गया था। मार्ग बनाने से यहां पर्यटन को अधिक बढ़ावा मिलेगा।
-बलराम कुशवाहा।
कैप्शन-भरत रिछारिया।
मंदिरों की खराब दुर्दशा और मार्ग की मरम्मत के लिए अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों तक बात रखी। अब भी स्थिति जस की तस है, लेकिन मंदिरों की दुर्दशा सुधारने के लिए लगातार आवाज उठाते रहेंगे।
-भरत रिछारिया।
प्राचीन धरोहरों तक पहुंचने वाले मार्गों का सर्वे कराया जाएगा। जहां भी सड़क व पहुंच मार्ग खराब हैं, उसके लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा।-राजीव त्रिवेदी, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, झांसी।
