झांसी/बंगरा। महिलाओं को सुरक्षा का अहसास कराने के लिए सरकार मिशन शक्ति अभियान चला रही है, लेकिन थाने की पुलिस अपनी कार्यशैली बदलने को राजी नहीं है। ताजा मामला उल्दन थाने का सामने आया है। कई महीने से छेड़खानी एवं धमकी से परेशान पीड़िता सात माह से उल्दन थाने के चक्कर लगा रही थी, लेकिन पुलिस ने उसकी सुनवाई नहीं की।

आखिरकार उसे अफसरों से गुहार लगानी पड़ी। आला अफसरों के निर्देश पर शुक्रवार को उल्दन थाना पुलिस को मजबूरन पांच आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट समेत कुल ग्यारह धाराओं में मामला दर्ज करना पड़ा। पुलिस ने अब मामले की जांच शुरू की है।

पीड़िता के पति ने पुलिस को बताया कि वह फास्ट फूड का ठेला लगाकर जीविकोपार्जन करता है। निमौनी गांव का रहने वाला बादल कुशवाहा उसकी पत्नी को इंस्टाग्राम पर वीडियो भेजकर परेशान करता है। बादल के मैसेज भेजकर बात करने की इच्छा जताने पर पत्नी से उसे डपट दिया था। इसके बाद आरोपी मोबाइल पर अश्लील वीडियो और मैसेज भेजने लगा। पत्नी के विरोध करने पर आरोपी 11 फरवरी को घर में घुस आया और अश्लील हरकत करते हुए जान से मार डालने की धमकी दी।

इससे डरकर दंपती ने किराये के घर को बदल दिया। इसके बावजूद आरोपी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। उल्दन था पुलिस से शिकायत करने का भी फायदा नहीं हुआ। मार्च महीने में आरोपी ने अपने दोस्त विशाल सेन, सत्यम उर्फ चीकू सेन, कृष्णकांत उर्फ बल्ली, अजय शर्मा समेत अन्य के साथ उसके घर में घुसकर फिर से छेड़खानी की। 18 मार्च को उसके फास्टफूड ठेले पर आकर पति को जाति सूचक गलियां देते हुए पीटा। कई बार शिकायत के बाद भी पुलिस आरोपियों के साथ रही। उसकी शिकायत पुलिस ने नहीं सुनी। आखिरकार पीड़ित दंपती ने एसएसपी और आईजी से गुहार लगाई। उनके दखल पर आखिरकार उल्दन थाने में मुख्य आरोपी बादल कुशवाहा, विशाल सेन, सत्यम उर्फ चीकू सेन, कृष्णाकांत उर्फ बल्ली, अजय शर्मा समेत तीन अज्ञात के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट समेत बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज हुआ। सीओ रक्षपाल सिंह के मुताबिक तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना शुरू करा दी गई है।

पीड़िता की मदद के बजाय रेकी करते दिखे उल्दन थाने के सिपाही

कई महीने से छेड़छाड़ की शिकार हो रही पीड़िता की मदद के बहाने उल्दन थाने के सिपाही उसकी रेकी करते नजर आए। पीड़िता का आरोप है कि वह जब गुहार लगाने के लिए जाती थी, तब धमकाने के लिए दो सिपाही भी उसके पीछे आ जाते थे। पीड़िता के पति का कहना है कि बृहस्पतिवार को जब वह गुहार लगाने के लिए जा रहे थे तब दो सिपाहियों ने उनका कार्यालय तक पीछा किया। दंपती ने दोनों सिपाहियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। इन दोनों सिपाहियों की फुटेज भी कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, यहां दोनों सिपाही नजर आ रहे हैं।

पुलिस के समय पर सुनवाई न करने से जान गवां चुकीं दो बेटियां

छेड़खानी जैसे मामलों में पुलिस के असंवेदनशील रवैये की वजह से दिल को झकझोरने वाली कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पुलिस के समय पर कार्रवाई न करने की वजह से पिछले माह ही दो पीड़िताओं ने फंदा लगाकर जान दे दी। 19 अक्तूबर को चिरगांव थाना क्षेत्र निवासी किशोरी ने फंदा लगाकर जान दे दी। परिजनों का आरोप था कि पड़ोस में रहने वाला दसवीं का छात्र किशोरी से छेड़खानी करता था। कुछ दिनों पहले विरोध करने पर चचेरे भाई को पीट दिया था। इससे दुखी होकर किशोरी ने फंदा लगाकर जान दे दी। उसकी मौत के बाद आखिरकार पुलिस ने 22 अक्तूबर को बाल अपचारी को संरक्षणात्मक अभिरक्षा में लिया। इसी तरह 23 सितंबर को गुरसराय में दुष्कर्म के बाद युवती ने सुसाइड कर लिया था। इस मामले में भी परिजनों ने पड़ोस में रहने वाले नाबालिग पर दुष्कर्म का आरोप लगाया। दूसरे स्थानों पर भी छेड़खानी जैसे मामले सामने आ चुके,जिसमें पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई नहीं की।



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