Ten progressive farmers received the Krishi Veer award.

रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृ​षि विश्वविद्यालय में क्षेत्रीय 

झांसी। बुंदेलखंड में जल संकट और खेती की बढ़ती लागत के बीच किसानों की आय बढ़ाने के विकल्पों पर शनिवार को रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में शनिवार को आयोजित किसान कारवां 2.0 की पांचवीं क्षेत्रीय किसान महासभा में चर्चा हुई। इसमें जल संरक्षण, दलहन-तिलहन की खेती, औषधीय फसलों, मत्स्य पालन और कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन पर जोर दिया गया। महोबा की उद्यमी मयंकिता चौरसिया ने पान की खेती और उससे जुड़े उत्पादों में मूल्यवर्धन के अनुभव साझा किए। वहीं, झांसी के प्रगतिशील किसान पुष्पेंद्र यादव ने तुलसी जैसी औषधीय फसलों की खेती और प्रसंस्करण की संभावनाएं बताईं। अधिष्ठाता मात्स्यिकी डॉ. पीके पांडे ने मत्स्य पालन को आय का अतिरिक्त स्रोत बनाने की जानकारी दी।


‘कम पानी में दम दिखाने वाली फसलें’ विषय पर आयोजित सत्र में निदेशक शोध डॉ. एसके चतुर्वेदी, अधिष्ठाता कृषि डॉ. आरके सिंह और पुष्पेंद्र यादव ने विचार रखे। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह ने दलहन-तिलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों और उपयुक्त किस्मों को अपनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में झांसी के पुष्पेंद्र सिंह यादव और तान्या बंसल समेत विभिन्न जिलों के 10 किसानों को ‘कृषि वीर’ सम्मान प्रदान किया गया। कुलपति ने सम्मानित किसानों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न दिए। महासभा में किसानों की समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाने के लिए कृषि परिषद के गठन की पहल पर भी चर्चा हुई।

महासभा का शुभारंभ के मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर में लगभग 22 एकड़ क्षेत्र में तालाब हैं, जिनसे करीब 300 एकड़ कृषि फार्म में खेती को मदद मिलती है। उन्होंने किसानों को स्थानीय मिट्टी, जलवायु और उपलब्ध जल संसाधनों के अनुरूप फसलें अपनाने की सलाह दी।



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