results become a prestige issue for the Samajwadi Party; the Leader of the Opposition must win three seats

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए चुनौती बने चुनाव।
– फोटो : amar ujala

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विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष का पद बचाने के लिए इस चुनाव में सपा को न्यूनतम तीन सीटें जीतना जरूरी है। मौजूदा समय में सपा के 10 सदस्य हैं, जिनमें से 3 का कार्यकाल 6 दिसंबर को खत्म हो रहा है। 6 दिसंबर को कार्यकाल पूरा करने वाले 11 सदस्यों की सीटों पर ही चुनाव प्रक्रिया चल रही है। मतदान हो चुका है और 27 अक्तूबर को मतगणना होगी।


विधान परिषद में कुल सदस्य संख्या 100 है। वर्तमान में इनमें से एक पद खाली है। यह पद वर्ष 2024 में जितिन प्रसाद के सांसद चुने जाने से रिक्त हुआ था। जितिन को राज्यपाल के स्तर से मनोनीत किए जाने वाले कोटे से एमएलसी बनाया गया था। नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए जरूरी है कि संबंधित दल के पास कुल चुने गए सदस्यों के न्यूनतम 10 प्रतिशत सदस्य होने चाहिए। इस हिसाब से देखा जाए तो विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए संबंधित दल के पास न्यूनतम 10 सदस्य होने चाहिए।

वर्तमान में विधान परिषद में सपा के 10 सदस्य मो. जासमीर अंसारी, मुकुल यादव, शाहनवाज खान, डॉ. मान सिंह यादव, आशुतोष सिन्हा, लाल बिहारी यादव, राजेंद्र चौधरी, शाह आलम, किरणपाल कश्यप और बलराम यादव हैं। इनमें से तीन सदस्य डॉ. मान सिंह यादव, आशुतोष सिन्हा व लाल बिहारी यादव का कार्यकाल दिसंबर में पूरा हो जाएगा और इन तीनों को सपा ने इस चुनाव में भी अपना प्रत्याशी बनाया है। विधान परिषद नियमावली के जानकार बताते हैं कि इन 11 सीटों में से न्यूनतम तीन सीटें सपा को जीतना जरूरी है, तभी उसका नेता प्रतिपक्ष का पद बच सकेगा।



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