लखनऊ। चीन में बने सिम बॉक्स के जरिये भारतीय मोबाइल नंबरों से विदेश में बैठे साइबर ठगों को कॉल करने की सुविधा दी जा रही थी। लखनऊ में पकड़े गए अवैध टेलीफोन एक्सचेंज नेटवर्क के जरिये कॉल करने वाले की वास्तविक लोकेशन और पहचान छिपाई जा सकती थी। क्राइम ब्रांच की जांच में नेटवर्क में इस्तेमाल किए जा रहे 192 ई सिम सक्रिय मिले हैं। पुलिस अब इनका इस्तेमाल कर देश के दूसरे हिस्सों में हुए साइबर अपराधों से नेटवर्क के कनेक्शन तलाश रही है।

बता दें कि क्राइम ब्रांच ने शनिवार को शहर के चार ठिकानों पर कार्रवाई के दौरान छह 32 पोर्ट वाले सिम बॉक्स, राउटर, वीपीएन गेटवे और अन्य नेटवर्किंग उपकरण बरामद किए थे। इन सभी उपकरणों पर मेड इन चाइना लिखा मिला है। पुलिस अब इनके स्रोत, आपूर्ति और भारत पहुंचने के तरीके की जांच कर रही है।

एडीसीपी क्राइम किरन यादव ने बताया कि तलाशी में साउंड एंपलीफायर के अलग-अलग पुर्जे और उनसे संबंधित सामग्री भी मिली है। आशंका है कि सिम बॉक्स को साउंड एंपलीफायर के रूप में दिखाकर अवैध तरीके से भारत लाया गया हो। आरोपियों ने अपने ठिकानों की निगरानी के लिए मुख्य दरवाजे पर सीसीटीवी कैमरे के बजाय वाई-फाई से जुड़ी फेस डोर बेल लगा रखी थी।

एडीसीपी ने बताया कि सिम बॉक्स इंटरनेट के जरिये आने वाली कॉल को भारतीय मोबाइल नेटवर्क से आगे भेज सकता है। इसके जरिये विदेश में बैठा साइबर ठग भारतीय मोबाइल नंबर से कॉल कर सकता है जबकि कॉल का वास्तविक संचालन दूसरे देश में होता है। डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी और अधिकारी बनकर ठगी करने जैसे अपराधों में इस तकनीक का दुरुपयोग हो सकता है।

एनसीआरपी के रिकॉर्ड से हो रहा मिलान

एडीसीपी ने बताया कि बरामद उपकरणों के इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी (आईएमईआई) और अन्य तकनीकी पहचान का मिलान राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज शिकायतों से किया जा रहा है। इसके लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के साथ भी जानकारियां साझा की जा रही हैं।

जानिए ई सिम

ई सिम (एंबेडेड सिम) आपके मोबाइल फोन में पहले से लगा हुआ एक डिजिटल सिम कार्ड होता है, जिसके लिए किसी प्लास्टिक वाले फिजिकल सिम कार्ड को लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है।



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