झांसी। स्वरोजगार का प्रलोभन देकर 30 लाख रुपये ऐंठने के मामले मे सीजेएम सुधा यादव की अदालत ने दो अभियुक्तों को सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों दोषियों पर ढाई-ढाई हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत के इस फैसले से रोजगार देने के नाम पर लोगों को ठगने वालों को कड़ा संदेश गया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, करीब 11 वर्ष पहले 28 जून 2015 और उसके आसपास अमृतसर निवासी रमनदीप सिंह कौर तथा सहारनपुर निवासी कमलेश शर्मा ने सरल स्वरोजगार दिलाने का झांसा देकर मीटिंग में व्याख्यान देकर बॉन्ड के माध्यम से कई लोगों से 30 लाख रुपये जमा कराए थे। इसके बाद एक पीड़ित नरेंद्र कुमार ने नवाबाद थाने पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की थी।
पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य और गवाह पेश किए गए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रमनदीप सिंह कौर और कमलेश शर्मा को दोषी पाया।
