सकरार। कस्बे के श्री श्री 1008 श्री अवध बिहारी जी सरकार मंदिर में कार्तिक मास के पावन अवसर पर प्रतिदिन सुबह से ही महिलाओं की टोली ठाकुर जी की पूजा-अर्चना के लिए एकत्रित हो रही है। मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में कार्तिक गीतों और भजनों से गूंज रहा है।
इस दौरान शगुन मिश्रा, छाया मिश्रा, पिंकी, कुसुम गौर, नेहा गौर, लक्ष्मी, राधा जादौन, मीना, गुड़िया, मुन्नी चाची, रामकुमारी, गुड्डी, रजनी, सुनीता, राधा, छाया चौहान, आशा चौहान, सुनीता चौहान, शशि गौर, अंकिता चौहान, सुखदेवी, सुमन, मुन्नी, मधु, हेमा कुशवाहा, सीमा कुशवाहा, रेखा, दीक्षा सैन सहित अन्य महिलाएं पारंपरिक कार्तिक गीतों की मधुर प्रस्तुतियां देकर ठाकुर जी की आराधना करती हैं।
महिलाएं ”आ जाउंगी बड़े भोर दहीरा लेकर आ जाउंगी बड़े भोर” और ”अपने गोपाल जी को पालना झुला लाउंगी” जैसे पारंपरिक गीत गाकर भक्ति भाव प्रकट करती हैं। इसके बाद तुलसी महारानी की ”नमो नमो” स्तुति के साथ तुलसी पूजन किया जाता है। तत्पश्चात पंडित गोल्डी महाराज द्वारा सभी सखियों को कार्तिक मास की धार्मिक कथा का रसपान कराया जाता है। पूजन और कथा के समापन पर सभी महिलाएं ”गिरधारी मोरो बारो गिर न परे” जैसे पारंपरिक कार्तिक गीत गाते हुए अपने-अपने घरों को प्रस्थान करती हैं। कार्तिक मास की यह परंपरा कस्बे में धार्मिक आस्था, महिला सहभागिता और बुंदेली लोक संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत कर रही है।
