झांसी। धनतेरस पर्व के साथ शुक्रवार को दीपोत्सव का शुभारंभ हो जाएगा। कार्तिक पूर्णिमा तक त्योहारों का उल्लास रहेगा। घर-घर दीप प्रज्वलित होंगे और सभी लोग त्योहारों के आनंद में विभोर होंगे।

धनतेरस पर भगवान धनवंतरी की पूजा आराधना होगी। सात नवंबर को नरक चतुर्दशी मनाई जाएगी, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था। इस दिन यम दीप प्रज्वलित करने का भी महत्व है।

आठ नवंबर को दिवाली मनाई जाएगी। घरों एवं व्यापारिक प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश एवं कुबेर जी का पूजन होगा। श्रद्धालु दीप प्रज्वलित कर भगवान श्रीराम के अयोध्या में वापस आने की खुशियां मनाएंगे। महंत मार्तंड दत्त स्वामी के अनुसार, नौ नवंबर सोमवार को उदयातिथि में अमावस्या होने से सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा होगी। 11 नवंबर को भाईदूज पर्व मनाया जाएगा। बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और सुखद जीवन की कामना कर तिलक करेंगी।

17 को गोपाष्टमी और 20 को देवउठनी एकादशी

13 नवंबर को सूर्य षष्ठी व्रत एवं पूजा शुरू होगी एवं समापन 15 नवंबर को होगा। 17 को गोपाष्टमी मनाई जाएगी। श्रद्धालु गोमाता की पूजा करेंगे। 18 नवंबर को आंवला नवमी पर श्रद्धालु आंवले के पेड़ की परिक्रमा एवं पूजा करेंगे। यह त्योहार पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है। 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। पर्व पर भगवान विष्णु का जागरण होगा। चातुर्मास का समापन होगा और मांगलिक कार्य पुन: शुरू हो जाएंगे। पर्व पर भगवान शालिगराम जी एवं तुलसी जू का विवाह आयोजन मंदिरों में होंगे।

23 को बैकुंठ चतुर्दशी, 24 को पूर्णिमा

23 नवंबर को बैकुंठ चतुर्दशी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन देवता दिवाली मनाते है। भगवान विष्णु एवं भगवान शिव के मंदिरों में भव्य धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। 24 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा मनाई जाएगी। महिला श्रद्धालु भगवान कृष्ण की आराधना करेंगी। कार्तिक माह का स्नान एवं व्रत का परायण करेंगी। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान एवं दीपदान का विशेष महत्व है।



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