झांसी। दीपोत्सव पर हर घर रंगीन रोशनी से जगमगा रहा है। रविवार शाम घर-घर पूजन और फिर आतिशबाजी होगी। त्योहार की खुशी में आतिशबाजी सजगता से करें। जारी-सी लापरवाही से आंख की रोशनी और सुनने की शक्ति पर असर पड़ सकता है। खास यह कि यदि ऐसा हो जाए तो बिना समय गवाएं डॉक्टर से उपचार कराएं।
हर साल दिवाली पर आतिशबाजी के दौरान तमाम लोगों की आंख में चोट लग जाती है। कभी चिंगारी चली जाती है, तो कभी कभी बारूद का कण। इससे रोशनी पर असर पड़ता है। समय पर इलाज न मिलने पर छोटा सा घाव बड़ा रूप ले लेता है। वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. शमी ने बताया आतिशबाजी चलाने में जरा-सी असावधानी आंखों के लिए घातक हो सकती है। इसलिए दिवाली की खुशी में सुरक्षा का ध्यान भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि दिवाली पर सबसे ज्यादा खतरा बच्चों के लिए होता है। बच्चे उत्साह में पटाखों को बहुत करीब से चलाते है। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को अकेले पटाखे नहीं चलाने दें।
तेज आवाज से कान के पर्दे से आ सकता है खून
जिला अस्पताल के नाक-कान-गला विशेषज्ञ डॉ. मुकेश राजपूत ने बताया कि तेज आवाज की आतिशबाजी से श्रवण शक्ति पर असर पड़ता है। यदि 100 डेसीमल से ज्यादा की आवाज है, तो आंख का पर्दा फट सकता है अथवा खून भी आ सकता है। उन्होंने बताया कि तेज आवाज की आतिशबाजी से आसपास के लोगों में सडन हियर लॉस की समस्या हो जाती है।
ये सावधानियां बरतें
– आतिशबाजी चलाते समय चश्मा लगाएं, ताकि चिंगारी आंख में नहीं जाए
– सूती कपड़े ही पहनें। सिंथेटिक कपड़े आग जल्दी पकड़ते हैं, इससे बचें
– पूरा हाथ फैलाकर और चेहरा दूर रखकर ही पटाखे में आग लगाएं
– पटाखे खुली व सुरक्षित जगह चलाएं, भीड़-भाड़ में पटाखे नहीं फोड़ें
आंख में चिंगारी चली जाए तो ये करें
-आंख में कंकड़ या चिंगारी जाने पर बिल्कुल नहीं रगड़ें। इससे घाव हो सकता है।
– साफ और ठंडे पानी से देर तक आंख धोएं, ताकि बारूद या धूल कण बाहर निकले।
-यदि आंख में घाव हो गया है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
– उपचार में देरी पर घाव गंभीर हो सकता है, जिससे रोशनी भी जा सकती है।
– आंख में तेज दर्द, लालपन, धुंधला दिखे तो तुरंत नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाएं।

डॉ शमी
