उरई। गैर इरादतन हत्या के मामले में दोष सिद्ध होने पर अपर जिला सत्र न्यायाधीश प्रथम ने आरोपी को दोषी दस साल की सजा सुनाई और 25 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
सिरसाकलार थाना क्षेत्र के खड़गुई निवासी कीर्ति देवी ने 17 सितंबर 2018 को सिरसाकलार पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि उसके मोहल्ले के ही रहने वाले रामबहादुर उसके घर आए और उसके पति को अपने घर यह कहकर ले गए कि जमीन के बारे में बात करनी है। उसके पति के साथ रामबहादुर, उसकी पत्नी कुंती देवी और दोनों बेटे अमित, अंकित व जगदीश प्रदीप, बारे, वीरेंद्र पाल आदि लोगों ने एकराय होकर उसके पति सुनील को लाठी-डंडों से मारपीट कर घायल कर दिया।
झांसी में उसके पति सुनील कुमार की मौत हो गई। पुलिस ने रामबहादुर, उसकी पत्नी कुंती, उनके बेटे अमित, अंकित व जगदीश, प्रदीप, बारे, वीरेंद्र के खिलाफ गैर इरादतन हत्या सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचन शुरू की थी। जांच में अंकित अमित, बारे के खिलाफ कोई सबूत न मिलने के कारण उनके नाम जांच में निकाल दिए गए थे।
पुलिस ने रामबहादुर, कुंती, प्रदीप, जगदीश, वीरेंद्र के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थीं। छह साल कोर्ट में चले ट्रायल के बाद बुधवार को सुनवाई पूरी हुई। जिसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयानों और सबूतों के आधार पर प्रदीप, जगदीश, वीरेंद्र, कुंती को अपर जिला सत्र न्यायाधीश प्रथम शिवकुमार ने दोष मुक्त कर दिया। जबकि रामबहादुर को साक्ष्य और सबूतों के आधार पर गैरइरादतन हत्या का दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
