कालपी। डिप्थीरिया की बीमारी से नगर के अलग-अलग मोहल्ले में सात दिन के अंदर दो बच्चों की मौत हो गई। इन मोहल्ले में अभी तक नगर पालिका द्वारा फागिंग एवं दवा का छिड़काव नहीं किया गया।
नगर के मोहल्ला उदनपुरा निवासी प्रदीप कुमार अहिरवार के दस वर्षीय पुत्र विराट का 31 अगस्त को बुखार आया था। उन्होंने प्राइवेट हॉस्पिटल कालपी में उसका इलाज कराया। उसके गले में सूजन आने पर सीएचसी ले गए। डॉक्टर ने उसे उरई मेडिकल के लिए रेफर कर दिया। उरई मेडिकल कॉलेज से उसे झांसी मेडिकल के लिए रेफर कर दिया। जहां दो दिन बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। भाई सचिन ने बताया कि अभी तक यहां पर न तो किसी चिकित्सीय टीम का दौरा किया और न ही नगर पालिका द्वारा फागिंग कराई गई।
इसी प्रकार मोहल्ला रामचबूतरा नई बस्ती निवासी शमशाद के मुताबिक 24 अगस्त को पुत्री ईशा (6) की डिप्थीरिया की बीमारी होने के कारण ग्वालियर जय रोग चिकित्सालय में इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। उन्होंने बताया कि अभी तक हमारे यहां कोई भी चिकित्सीय टीम नहीं आई है और न ही मोहल्ले में दवा का छिड़काव किया गया है।
ये हैं लक्षण
सीएचसी कालपी के डॉ. विशाल सचान का कहना है कि डिप्थीरिया एक संक्रामक बीमारी है। डिप्थीरिया में गले में दर्द, कमजोरी, थकान, बुखार, गर्दन की ग्रंथियां में सूजन नाक और गले में ऊतकों के अवरोध के कारण सांस लेने में समस्या हो जाती है।
