विधान परिषद में बुधवार को जबरदस्त गतिरोध पैदा हो गया। नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने एक पूरक प्रश्न पूछा तो सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने उन्हें बैठने के लिए कहा। इस पर लाल बिहारी यादव ने पीठ पर लोकतंत्र की हत्या कर देने का आरोप मढ़ दिया। इस पर सभापति ने नेता प्रतिपक्ष को सदन से जाने के लिए कहा। काफी देर चली नोंकझोंक के बाद लाल बिहारी यादव ने पहले सभी सदस्यों के साथ वॉकआउट किया। सदन में दुबारा आने पर नेता प्रतिपक्ष ने सभापति के पुन: निर्देश पर सदन छोड़ा और खेद प्रकट किया। उसके बाद ही स्थिति सामान्य हो सकी।

विधान परिषद में निर्दल समूह के राजबहादुर सिंह चंदेल और आकाश अग्रवाल कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिये यूपी बोर्ड के स्कूलों की मान्यता के नियमों में ढील देने की मांग कर रहे थे। इसी बीच लाल बिहारी यादव भी खड़े होकर सवाल पूछने लगे। सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने उन्हें टोका तो उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से उन्हें पूरक प्रश्न पूछने का अधिकार है। कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि पीठ की अनुमति से ही कोई सवाल पूछा जा सकता है, इसकी स्पष्ट व्यवस्था नियमावली में है।

इस मुद्दे पर गतिरोध इतना बढ़ा कि सभापति ने कहा कि हमें कठोर निर्णय लेने के लिए बाध्य मत कीजिए। इसके बाद भी जब नेता प्रतिपक्ष अपनी बात कहते रहे तो पीठ से उनकी तब कोई बात रिकॉर्ड में न लेने की व्यवस्था दी गई। सपा के अन्य सदस्यों और शिक्षक व निर्दल समूह के सदस्यों ने भी लाल बिहारी यादव को बैठ जाने का सुझाव दिया, पर उन्होंने अपनी बात कहना जारी रखा। इसके बाद पीठ ने उन्हें सदन से जाने के लिए कहा। इस पर नेता प्रतिपक्ष सपा के सभी सदस्यों के साथ यह कहते हुए बाहर चले गए कि हम बहिर्गमन करते हैं।

माफी मांगने के बाद शांत हुआ मामला 

पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने सदन में कहा कि पीठ पर आरोप गंभीर विषय है। नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ पीठ से कठोर निर्णय लिया जाना चाहिए। सदन के सबसे वरिष्ठ सदस्य राजबहादुर सिंह चंदेल ने कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष क्षमा मांग लेते हैं तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए। सभापति ने चंदेल के कथन पर अपनी सहमति जताई।

करीब 15 मिनट बाद नेता प्रतिपक्ष सपा के सभी सदस्यों के साथ सदन में लौटे। सभापति ने नेता प्रतिपक्ष यादव को सदन से बाहर जाने के लिए कहा। नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि पीठ का सम्मान पक्ष-विपक्ष सभी को करना चाहिए। नियमावली और संविधान के दायरे में रहकर ही हम सभी को काम करना है। इसके बाद सपा के सभी सदस्यों ने आपस में विचार-विमर्श किया और नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी सदन से बाहर चले गए। उनके साथ कई और सपा सदस्य जाने लगे तो फिर कहा गया कि इसे नेता प्रतिपक्ष द्वारा सदन का त्याग करना नहीं माना जाएगा। तब सपा के किरणपाल कश्यप समेत कुछ सदस्य रुक गए। उसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने सदन में आकर पीठ की अनुमति से कहा कि अगर उनकी किसी बात से सभापति आहत हुए हैं तो वे इसके लिए खेद प्रकट करते हैं।



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