वित्तीय वर्ष के आखिरी दिनों में जारी होने वाला करोड़ों रुपये का बजट इस साल भी अफसरों के गले की फांस बन गया। तमाम कोशिश के बावजूद झांसी से करीब 89 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि खर्च न हो पाने से लौटा देनी पड़ी। लोक निर्माण विभाग जैसे बड़े महकमे ने सबसे अधिक रकम लौटाई। वित्तीय वर्ष के आखिरी तक काम आरंभ न करा पाने से उसे करीब 60 करोड़ लौटाने पड़े। सिंचाई विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग समेत कई निर्माण एजेंसी एवं विभागों को भी अंतिम समय में पैसा वापस करना पड़ा।


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विभिन्न विकास कार्यों के लिए हर साल सरकार बजट तय करती है लेकिन, बजट आवंटन में अक्सर महीनों का विलंब होता है। इस दफा भी 31 मार्च को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में यह कहानी दुहराई गई। लोक निर्माण विभाग को सड़क के लिए मार्च के आखिरी दिनों में करोड़ों का बजट आवंटित हुआ। 33.79 करोड़ की लागत से झांसी-बबीना के बीच सड़क चौड़ीकरण के लिए 14 मार्च को 6.74 करोड़ रुपये दिए गए लेकिन, काम आरंभ न हो पाने से पैसा वापस करना पड़ा। संपर्क मार्ग, ग्रामीण सड़क, सड़क चौड़ीकरण जैसे प्रोजेक्ट के लिए मार्च में पैसा दिया गया। यह पैसा भी लौटना पड़ा। मुख्य अभियंता राजनाथ गुप्ता भी मानते हैं कि करीब 60 करोड़ रुपये मार्च में लौटने पड़े। सिंचाई विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण इकाई, मंडी परिषद को पैसा वापस करना पड़ा। इन सभी विभागों को करीब 89 करोड़ रुपये लौटाने पड़े। 



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