मनमाना रवैया, आला अफसरों से अनबन, लापरवाही, दूसरे विभागों में अनावश्यक हस्तक्षेप आईएएस किंजल सिंह को भारी पड़ गया। उन्हें महज सात महीने में ही परिवहन आयुक्त पद से हटा दिया गया। इस दैारान कोई भी बड़ा उल्लेखनीय कार्य उनके खाते में नहीं है। अब उनके हट जाने पर तमाम तरह की चर्चाएं सुर्खियों में है।

प्रदेश सरकार ने 40 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इसमें परिवहन आयुक्त पद पर तैनात रहीं किंजल सिंह को भी हटाया गया है। उनकी जगह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लैाटे आशुतोष निरंजन को जिम्मेदारी सैांपी गई है। सूत्र बताते हैं कि विभागीय तालमेल के अभाव के चलते वह रडार पर थीं। 

अपने आला अफसरों अपर मुख्य सचिव व परिवहन मंत्री से उनकी नहीं बन रही थी। इतना ही नहीं तबादला नीति आने वाली है। ऐसे में तबादलों को लेकर विवाद खड़ा होने की आशंका जताई जा रही थी। एक आरटीओ, प्रशासन उनके बेहद करीबी हैं। 

जिनका स्थानांतरण तय माना जा रहा है। किंजल सिंह उन्हें बचाने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगाने को तैयार थीं, जबकि उनके विरोधी स्थानांतरण के लिए जीजान से लगे हुए हैं। हालांकि जब किंजल सिंह को परिवहन आयुक्त पद की जिम्मेदारी सैांपी गई तो विभाग में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कार्यकाल के दैारान उनके कई फैसले संदेह के घेरे में रहे।

 



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