यूपी में स्वास्थ्य विभाग में डॉर्क रूम सहायक की भर्ती में फर्जीवाड़ा एक्सरे टेक्नीशियन और लैब टेक्नीशियन भर्ती की तर्ज पर ही किया गया है। इसमें भी महानिदेशालय से लेकर संबंधित जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय तक की भूमिका मानी जा रही है। खबर प्रकाशित होने के बाद तमाम फर्जी डॉर्क रूम सहायक सोमवार दोपहर बाद अस्पताल से गायब हो गए हैं। विभाग ने भी जांच शुरू कर दी है।
स्वास्थ्य विभाग में वर्ष 2007 में लैब टेक्नीशियन, 2008 और 2016 में एक्सरे टेक्नीशियन भर्ती में भ्रष्टाचार हुआ था। इसमें भी एक चयनित के नाम पर चार से पांच लोगों को नियुक्ति पत्र जारी हुई था। इन सभी ने नौकरी हासिल कर ली। मुख्यमंत्री के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज हुई और पूरे मामले की जांच शुरू हुई।
भर्तियों में फर्जीवाड़ा करने वाला एक ही गैंग
जांच शुरू होते ही फर्जी नौकरी हासिल करने वाले गायब हो गए। एक्सरे टेक्नीशियन और लैब टेक्नीशियन की तर्ज पर ही डॉर्क रूम सहायक भर्ती में भी फर्जीवाड़ा हुआ है। ऐसे में माना जा रहा है कि इन सभी भर्तियों में फर्जीवाड़ा करने वाले एक ही गैंग हैं। यह गैंग महानिदेशालय से लेकर संबंधित जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय तक सक्रिय रहा।
फर्जी नियुक्ति पत्र जारी कराने से लेकर कार्यभार ग्रहण कराने तक में भूमिका निभाई। इतना ही नहीं कार्यभार ग्रहण करने के बाद सीएमओ कार्यालय से महानिदेशालय को भेजा जाने वाला प्रमाण पत्र भी रोकवा दिया। उसका सत्यापन नहीं होने पाया। क्योंकि सत्यापन होते ही पूरे मामले की पोल खुलनी तय थी।
