भगवंतपुरा स्थित मेजर ध्यान चंद्र वन में वन विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। वर्ष 2024 में विभाग की ओर से लगाए गए 5000 पौधे सूखकर डंडियों में तब्दील हो चुके हैं। वन क्षेत्र में अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद पौधों की कोई देखभाल नहीं की गई, इससे पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को करारा झटका लगा है।


जिले के बड़े अधिकारियों की ओर से रोपित पौधों के पास नाम वाले बोर्ड लगाए गए थे, जो हरियाली अभियान की सफलता का प्रतीक माने जा रहे थे। हकीकत में न तो बोर्ड बचे और न ही पौधे। पूरे क्षेत्र में सूखी डंडियों का मंजर दिखाई दे रहा है। पौधों का सूखना पर्यावरण के लिए घातक साबित हो रहा है। वृक्ष वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर ऑक्सीजन देते हैं। इन पौधों के नष्ट होने से स्थानीय स्तर पर वायु प्रदूषण बढ़ेगा, तापमान में वृद्धि होगी और जैव विविधता प्रभावित होगी। सूखे वन क्षेत्र में मिट्टी का कटाव तेज होगा, जल संरक्षण प्रभावित होगा तथा वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है।

डीएफओ नीरज आर्य ने बताया कि जो पौधे सूख गए है। उनके स्थान पर दूसरे पौधे रोपित किए जाएंगे।

भगवंतपुरा स्थित मेजर ध्यान चंद्र वन में देख रेख न होने से सूखे पौधे…



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