उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के बाद हाल में कैबिनेट मंत्री बने मनोज पांडेय की बटुक पूजा ने भाजपा राज में ब्राह्मणों की स्थिति पर चर्चा को फिर हवा दे दी है। सपा से बगावत कर भगवा रंग में रंगने और नई जिम्मेदारी मिलने के बाद मनोज पांडेय की इस नई सियासी पहल को भाजपा के साथ ब्राह्मणों की लामबंदी को पुख्ता करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
चर्चा छिड़ गई है कि ब्राह्मण कोटे से मंत्री बनने के चंद दिनों बाद ही बटुक पूजा कर मनोज पांडेय ने भाजपा से ब्राह्मण समाज की नाराजगी दूर करने का प्रयास किया है या पार्टी व सरकार में खुद को ब्राह्मण चेहरे के तौर पर स्थापित करने का जतन किया है।
बीते कई महीनों से भाजपा से ब्राह्मण समाज की नाराजगी की बात कही जा रही है। कई विधायक बयानों से इसे हवा भी देते रहे हैं। इस मुद्दे पर कुछ महीनों की गतिविधियों ने उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में ब्राह्मण नेताओं को राजनीति के ब्राह्मण विमर्श के केंद्र में आने का मौका दिया है। भाजपा की भी कोशिश यह संदेश देने की है कि उस पर ब्राह्मणों की उपेक्षा के आरोपों में दम नहीं है।
जाहिर है कि यह बटुक पूजा सिर्फ खुद की प्रासंगिकता बनाने-बढ़ाने और ब्राह्मणों के बीच पकड़ और पहुंच का संदेश देने के जतन तक सीमित नहीं है। पाठक और पांडेय का यह प्रयास आने वाले चुनाव में भाजपा को कितना लाभ दिला पाएगा, यह तो चुनाव में पता चलेगा लेकिन बटुक पूजा ने राजनीति में ब्राह्मण विमर्श को चर्चा के केंद्र में ला ही दिया है।
