बैंक अफसर मानस, उसकी पत्नी दिव्या और बहन तूलिका के शव का शुक्रवार को डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया। दोपहर बाद दिव्या के बहनोई भरत यादव शव लेकर रवाना हो गए। बैंकुंठ धाम पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पिता सतीश चंद्र मिश्र ने बेटी को मुखाग्नि दी। उधर, मानस और तूलिका के शव के पोस्टमार्टम में देरी होने से परिजन नाराज हो गए और हंगामा शुरू कर दिया।
परिजनों के हंगामे के बाद चौक और ठाकुरगंज थाने की पुलिस वहां पहुंची और लोगों को शांत कराया। हंगामे के बाद डॉक्टरों के पैनल को फिर से बुलाया गया और दोनों शवों का पोस्टमार्टम शुरू हुआ। शाम को पांच बजे के बाद पुलिस ने मानस के मामा को दोनों के शव सौंप दिए। पोस्टमार्टम हाउस पर दिव्या और मानस के रिश्तेदार एक-दूसरे से दूरी बनाए रखे। मामा अवधेश ने देर शाम भांजे और भांजी की अंतिम संस्कार बैकुंठ धाम पर कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में गोली लगने से मौत की पुष्टि हुई है। सिर में गाली फंसी मिली। वहीं, तूलिका के सिर में भी गोली फंसी थी, जबकि मानस के सिर से गोली आरपार हो गई थी। दिव्या के चेहरे व सिर पर चोट के छह निशान मिले हैं। तीनों का विसरा जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
दिव्या ने पारिवारिक न्यायालय में वाद दायर किया था। इस मामले में 18 अगस्त को कोर्ट में सुनवाई थी। पुलिस यह पता लगा रही है कि आखिर 18 अगस्त को ऐसा क्या हुआ था, जिसके बाद से मानस ने खतरनाक फैसला ले लिया। जानकारी जुटाई जा रही है कि कोर्ट परिसर में दंपति के बीच कहासुनी तो नहीं हुई थी। पुलिस 18 अगस्त को कोर्ट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी खंगाल रही है।
तूलिका को अकेला नहीं छोड़ना चाहता था मानस रिश्तेदारों ने बताया कि मानस अपनी बहन से बहुत प्रेम करता था। तूलिका की तबीयत बिगड़ने के बाद वह उसका पूरा ध्यान रखता था। आरोप है दिव्या चाहती थी कि मानस उसके साथ अकेले रहे। वह तूलिका के साथ नहीं रहना चाहती थी। इस बात को लेकर दोनों में कई बार विवाद हुआ था। मानस ने स्पष्ट किया था कि कुछ भी हो जाए वह बहन को अकेला नहीं छोड़ेगा। यही वजह है कि मानस ने पत्नी की हत्या के बाद आत्महत्या से पहले बहन की जान ले ली क्योंकि तूलिका का ध्यान रखने वाला परिवार में कोई और नहीं था।
