झांसी। पंचमुखी महादेव मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने पर समिति और दुकानदार पक्ष आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच विवाद की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। मंदिर समिति के सदस्यों ने कहा कि जेडीए की ओर सील करने के बाद भी दुकानें खोली जा रही हैं। शनिवार को भी एक दुकान खोली गई है। वहीं, दुकानदारों ने कहा कि मार्केट की जमीन पर कैमरे लगाए गए हैं।
बीते 11 अगस्त को जेडीए ने 26 दुकानों वाली पंचमुखी महादेव मंदिर परिसर में बनी अवैध मार्केट को सील कर दिया था। यह मार्केट बिना मानचित्र स्वीकृत कराए बनी हुई है। इससे पहले दिसंबर 2019 में भी मार्केट को सील किया गया था। बताया गया कि श्री श्री 1008 श्री पंचमुखी महादेव मंदिर सेवा समिति की ओर से यहां पर कुछ सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए थे। शनिवार को कुछ दुकानदार मार्केट की भूमि पर सीसीटीवी कैमरे लगाने का आरोप लगाते हुए विरोध करने पहुंच गए। इस पर समिति के सदस्यों के साथ उनकी बहस होने लगी। चूंकि, मंदिर में हवन चल रहा था तो मौके पर श्रद्धालुओं भी एकत्र हो गए।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। दोनों पक्षों को कोतवाली आकर अपनी बात रखने के लिए कहा। समिति के सदस्य कोतवाली पहुंचे। अध्यक्ष दीपक बट्टा का कहना है कि दुकानदार जेडीए की सील तोड़कर दुकानें खोल रहे हैं और व्यापार कर रहे हैं। शनिवार को भी एक दुकान की सील तोड़ी गई। जेडीए प्रशासन को पहले भी दुकानों की सील तोड़ने की सूचना दी जा चुकी है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। सील तोड़ने वाले दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जो कैमरे लगे हैं, वो भी मंदिर परिसर की भूमि पर लगे हैं। इस दौरान पं. अमर सिद्ध, समिति प्रबंधक वैभव बट्टा, उप प्रबंधक राजीव सक्सेना, अंकित अग्रवाल, शनि बट्टा आदि मौजूद रहे। इसके बाद सदस्य जेडीए भी पहुंचे। यहां कोई अधिकारी न मिलने पर शिकायती पत्र स्टाफ को देकर लौट आए।
बेतवा नहर की मरम्मत में लापरवाही, शिकायत पर लीपापोती का आरोप
– आईजीआरएस पर शिकायत के बाद आख्या में अपलोड कर दी धुंधली तस्वीर
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बड़ागांव प्रखंड स्थित ग्राम पंचायत वनगुवां में बेतवा नहर की मरम्मत और निर्माण कार्य में लापरवाही का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नहर का प्राकृतिक संरेखण सीधा रखने के बजाय मोड़कर टेढ़ा बना दिया गया, जिससे पानी के बहाव और नजदीकी सड़क पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
इस संबंध में वनगुवां के विवेक कुमार समेले ने आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में नहर के निर्माण में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया। उनका आरोप है कि सपरार प्रखंड, झांसी के अधिकारियों ने मौके की वास्तविक स्थिति सुधारने के बजाय पोर्टल पर धुंधली और अस्पष्ट तस्वीरें अपलोड कीं। उन्होंने कागजों में फर्जी आख्या तैयार कर शिकायत को निस्तारित दिखा दिया। यह प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी पोर्टल पर की गई लीपापोती का मामला है। शिकायतकर्ता के अनुसार नहर का गलत संरेखण पानी के बहाव को प्रभावित कर रहा है। इससे पास की सड़क को भी नुकसान पहुंच रहा है। यह जनता के साथ धोखाधड़ी है और उच्च अधिकारियों को इसकी जांच करनी चाहिए। ब्यूरो
वर्जन..
सोमवार को टीम को जांच करने के लिए मौके पर भेजा जाएगा। यदि किसी दुकान की सील टूटी मिलती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जााएगी।
– हिमांशु गौतम, जेडीए उपाध्यक्ष।
-पूर्व मंत्री रतनलाल ने भाजपा छोड़ बेटे के साथ थामा सपा का दामन
फोटो..
-पांच बार रह चुके हैं विधायक, जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि भी शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। पूर्व मंत्री रतनलाल अहिरवार ने भाजपा छोड़कर अपने बेटे के साथ समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है। साथ में जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि भी सपा में शामिल हुए हैं। शनिवार को लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की उपस्थिति में सभी ने सपा जॉइन की।
बबीना सीट से 1989 में भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर रतन लाल अहिरवार पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद बीजेपी से ही वह 1991 में दूसरी और 1993 में तीसरी बार विधायक बने। हालांकि, वर्ष 1996 में वह चुनाव हार गए। 2002 का विधानसभा चुनाव उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा और चौथी बार विधायक बने। फिर वह बसपा में शामिल हुए और 2007 में पांचवीं बार विधायक बने और उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया।
2023 में हुए निकाय चुनाव से ठीक पहले रतनलाल की फिर से भाजपा में वापसी हो गई। हालांकि, करीब साढ़े तीन साल बाद उनका भाजपा से फिर मोहभंग हो गया और शनिवार को उन्होंने अपने बेटे रोहित रतन, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि जितेंद्र पटेल के साथ सपा की सदस्यता ले ली। इस दौरान लखनऊ में सपा लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अभिषेक यादव प्रज्वल भी मौजूद रहे।
2022 में मऊरानीपुर से चुनाव लड़ चुके रोहित
रोहित रतन 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा के टिकट पर मऊरानीपुर से चुनाव लड़ चुके हैं। वह तीसरे स्थान पर रहे थे। इससे पहले वह 2010 में जिला पंचायत सदस्य भी रह चुके हैं। रोहित के मुताबिक उन्होंने 2023 में ही बसपा से इस्तीफा दे दिया था।
