झांसी। नगर निगम की प्रीमियम पार्किंग का ठेका देने में शर्तों में बदलाव का खामियाजा अब सरकारी खजाने को भुगतना पड़ रहा है। निगम की पार्किंग से पहले जहां सालाना करीब 50 लाख रुपये की आय होती थी, वहीं ठेका निजी फर्म को दिए जाने के बाद यह घटकर करीब सात लाख रुपये रह गई। आय में भारी गिरावट के बाद कराई गई जांच में फर्म की ओर से की गई वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं।
तीन सदस्यीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। अब 10 सितंबर को मंडलायुक्त की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में रिपोर्ट रखी जाएगी। इसके आधार पर फर्म के साथ आगे का करार जारी रखने या उसे बाहर करने पर निर्णय लिया जाएगा। बता दें कि अमर उजाला ने इसी साल 13 मई के अंक में ””रिकाॅर्ड गोल, 20 करोड़ निकल आई देनदारी”” शीर्षक से इसका खुलासा किया था। तब से इस मामले की जांच चल रही थी।
12 पार्किंग स्थलों पर 2,583 वाहनों की क्षमता
नगर निगम के स्वामित्व वाली मिनर्वा, रानी महल, मंडी रोड, बस स्टैंड, जर्मनी हॉस्पिटल समेत 12 स्थानों पर प्रीमियम पार्किंग संचालित हैं। इनकी कुल क्षमता 1,010 चार पहिया और 1,573 दो पहिया वाहनों की है। इनके संचालन के लिए निगम ने पिछले वित्तीय वर्ष में निविदा प्रक्रिया शुरू की थी। आरोप है कि मनचाही फर्म को ठेका देने के लिए निविदा की शर्तों में बदलाव किया गया। ठेका मिलने के बाद फर्म ने पार्किंग के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित कर दीं। 24 घंटे की पार्किंग दर भी तय की गई।
12 हजार वाहनों की एंट्री, एक्जिट का रिकॉर्ड नहीं
पार्किंग से निगम की आय में भारी गिरावट के बाद पार्षदों ने सवाल उठाए। कार्यभार संभालने के बाद नगर आयुक्त आकांक्षा राणा ने मामले की जांच कराई। मई में हुई जांच में पार्किंग के भीतर करीब 12 हजार वाहनों की एंट्री दर्ज मिली, लेकिन उनके बाहर निकलने का रिकॉर्ड नहीं मिला। इन वाहनों को 24 घंटे तक पार्किंग में खड़ा मानते हुए निगम प्रशासन ने फर्म पर करीब 20 करोड़ रुपये की देनदारी निर्धारित की।
इसके बाद निगम प्रशासन और फर्म के बीच विवाद बढ़ गया। फर्म की ओर से जवाब दिए जाने के बाद दस्तावेजों की जांच के लिए लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई। कमेटी ने जांच पूरी कर रिपोर्ट तैयार कर ली है। इसमें फर्म की ओर से बरती गईं कई अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
मामले में संबंधित फर्म को नोटिस दिया गया था। तीन सदस्यीय कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। 10 सितंबर को मंडलायुक्त के सामने रिपोर्ट रखी जाएगी। इसके बाद फर्म के संबंध में निर्णय लिया जाएगा। – राहुल यादव, अपर नगर आयुक्त
सुलगते सवाल
पार्किंग ठेके की शर्तों में बदलाव किसके कहने पर किया गया?
फर्म को ठेका देने से पहले निगम ने नियमों की पड़ताल क्यों नहीं की?
पार्किंग की आय में इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
12 हजार वाहनों की एंट्री दर्ज हुई तो उनकी एक्जिट का रिकॉर्ड क्यों नहीं मिला?
इन वाहनों की निगरानी और रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी किसकी थी?
निगम को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
क्या फर्म को ब्लैकलिस्ट करने पर भी विचार होगा?
निगम को भविष्य में ऐसी वित्तीय गड़बड़ी से बचाने के लिए क्या व्यवस्था बदलेगी?
