मेडिकल कॉलेज में एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था पूरी तरह से बेपटरी हो गई है। एक्सरे के लिए सुबह से शाम तक रोगियों की लाइन लग रही है। अल्ट्रासाउंड के लिए एक माह बाद की तिथि मिल रही है। ऐसे में रोगी को मजबूरन निजी केंद्र की तरफ रुख करना पड़ रहा है। वहीं, गर्भवतियों को भी एक-एक माह बाद की तारीख दी जा रही है।

मेडिकल कॉलेज की ओपीडी और वार्डों में भर्ती रोगियों के एक्सरे ओपीडी ब्लॉक में लगी दो एक्सरे मशीन पर होते हैं। वहीं, इमरजेंसी में आने वाले रोगियों के एक्सरे इमरजेंसी में ही किए जाते हैं। इसके अलावा ओपीडी और वार्डों में भर्ती रोगियों के अल्ट्रासाउंड ओपीडी के कक्ष नं. 132 और 135 में किए जाते हैं।

ओपीडी की दो एक्सरे मशीनों में से एक करीब ढाई माह से खराब है। डेढ़ माह से कक्ष नं. 135 में लगी अल्ट्रासाउंड मशीन खराब है। इस वजह से गंभीर रोगियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ओपीडी में आने वाले रोगियों को एक्सरे कराने के लिए सुबह से शाम तक लाइन में लगना पड़ रहा है। यही स्थिति वार्डों में भर्ती रोगियों को भी झेलनी पड़ रही है। यही नहीं, अल्ट्रासाउंड कराने के लिए ओपीडी अथवा स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में आने वाली गर्भवती महिलाओं को एक-एक माह बाद की तारीख दी जा रही है। इन हालातों के चलते रोगियों को एक्सरे अथवा अल्ट्रासाउंड कराने के लिए निजी सेंटरों की तरफ रुख करना पड़ रहा है।

रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप चंदेल का कहना है कि एक्सरे की मशीन तो सही है, मगर उसका प्रिंटर खराब है। रूम नं. 135 की अल्ट्रासाउंड मशीन सही है मगर उसका प्रोब खराब है। इसके लिए कंपनी को पत्र लिखा जा चुका है। कॉलेज प्रशासन को भी पत्र लिखकर अवगत करा दिया है। वहीं, प्राचार्य डॉ. सुधीर कुमार का कहना है कि यह मामला अब संज्ञान में आया है। विभागाध्यक्ष से इस मामले में जानकारी की जाएगी। खराब मशीनों को जल्द से जल्द सही कराया जाएगा।



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