– पिछले चार माह में जीएसटी परिक्षेत्र में पंजीकृत हुईं 2400 नई फर्म, नहीं भर रहे थे मासिक और त्रैमासिक रिटर्न

विष्णु दुबे

झांसी। राज्य कर विभाग (जीएसटी) में रजिस्टर्ड 2400 व्यापारी फर्म की जांच में 170 फर्म कागजों पर पाई गईं। जबकि, 100 अन्य संदिग्ध फर्मों की खंड अफसर छानबीन कर रहे है। यह सभी फर्म पिछले एक अप्रैल से 31 जुलाई के दौरान ऑनलाइन पंजीकृत कराई गईं थीं। इसमें 270 व्यापारी फर्म द्वारा किसी प्रकार का कारोबार न दिखाने एवं मासिक के साथ त्रैमासिक रिटर्न दाखिल न किए जाने पर विभाग की रडार पर थीं।

जीएसटी परिक्षेत्र के अधीन सात जिलों झांसी, ललितपुर, जालौन, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट और बांदा में पिछले चार माह में 2400 नए व्यापारियों ने ऑनलाइन विभाग में पंजीयन कराया था। सभी व्यापारियों के मासिक रिटर्न के साथ त्रिमासिक रिटर्न की जांच कर रहे सभी खंड के सहायक कमिश्नरों ने करीब 270 व्यापारी फर्म को संदिग्ध मानते हुए सूची तैयार की। एडीशनल कमिश्नर ग्रेड-वन झांसी परिक्षेत्र डीके सचान के आदेश पर सभी संदिग्ध फर्म का भौतिक सत्यापन कराया गया। मौके पर कई फर्म कागजों में चलती मिलीं तो कुछ ने अन्य कारणों से व्यापार गतिविधियों से अलग काम करते मिले। ऐसे में विभाग ने पिछले एक माह की छानबीन रिपोर्ट के आधार पर 170 फर्मों के रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिए। जबकि, 100 अन्य रजिस्टर्ड व्यापारी फर्मों की विभाग छानबीन में जुटा है।

जीएसटी परिक्षेत्र के एडीशनल कमिश्नर ग्रेड वन डीके सचान ने बताया कि पिछले चार माह में रजिस्टर्ड फर्म द्वारा मासिक रिटर्न व त्रिमासिक रिटर्न दाखिल नहीं किया गया। ऐसे में खंड अफसरों को इन फर्मों की जांच के आदेश दिए गए थे। जांच के दौरान निष्क्रिय और कागजों में संचालित पाए जाने वाली 270 पंजीकृत फर्म में से 170 का पंजीयन निरस्त कर दिया है। जबकि, अन्य फर्म की जांच चल रही है।

00000000

पंजीकृत फर्म होने के बाद ही संभव है जांच

एडीशनल कमिश्नर ग्रेड वन डीके सचान ने बताया कि अब ऑनलाइन जीएसटी रजिस्ट्रेशन की सुविधा है। ऐसे में सातों जिले से कहीं भी बैठकर व्यक्ति ऑनलाइन दस्तावेज के आधार पर फर्म का पंजीकरण करा सकता है। ऐसे में प्राथमिक तौर पर रजिस्टर्ड फर्म की जांच संभव नहीं होती है। मासिक व त्रैमासिक रिटर्न के आधार पर संदिग्ध फर्मों की जांच के लिए खंड अफसर जांच करते हैं और मौके पर भौतिक सत्यापन में दस्तावेज में गड़बड़ी व मौके पर व्यापारी फर्म का कार्यालय न होने या फिर कारोबार न करने की दशा में ऐसी फर्म का पंजीयन निरस्त किया जाता है।

000000000

तथ्य छिपाने वालों पर की जाती है कार्रवाई

एडीशनल कमिश्नर ग्रेड-वन ने बताया कि जीएसटी में पंजीकृत फर्म के संदिग्ध गतिविधियों व आईटीसी (इनपुट क्रेडिट टैक्स) क्लेम के साथ कारोबार संबंधी गतिविधियों पर गड़बड़ी पर फर्म का रिकार्ड ऑनलाइन तैयार किया जाता है। रिटर्न व आईटीसी के अंतर पर ऐसी फर्म का भौतिक सत्यापन कराया जाता है। मौके पर फर्म न मिलने और दर्ज कराए गए दस्तावेज के आधार पर जांच में फर्जीवाड़ा मिलने पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाती है।

000000000

कारोबार नहीं कर रहे थे तो फर्म का कार्यालय नहीं मिला

हमीरपुर जिले की पंजीकृत फर्म का व्यापारी अन्य दूसरे जिले में रहता है। जबकि फर्म का पता हमीरपुर का दिया गया। दस्तावेज के आधार पर भौतिक सत्यापन में जानकारी मिली कि शुरुआत में कार्यालय बना था, लेकिन अब पूरा परिवार दूसरे जिले में शिफ्ट हो गया है। ऐसे में उसने कोई कारोबार शुरू नहीं किया। पंजीकृत फर्म के संचालक ने बताया कि हालात खराब होने से काम शुरू करने में असमर्थता जताई। इसी प्रकार उरई के एक व्यापारी की फर्म का न तो कार्यालय मिला और न ही बोर्ड। दस्तावेज की छानबीन में पता चला कि उसने लोन के लिए आवेदन किया, लेकिन लोन पास न होने से वह गांव जाकर अन्य कोई कार्य कर जीवन-यापन कर रहा है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *